Abstract of Published Articles

Abstract of Published Articles

धुआँ रहित तंबाकू का उपयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण: एक वैश्विक व्यवस्थित समीक्षा

Smokeless Tobacco Use and Public Health Nutrition: A Global Systematic Review. Public Health Nutrition,

Shikha Saxena 1Prashant Kumar Singh 1Lucky Singh 2Shekhar Kashyap 3Shalini Singh 1

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/35618706/

सारांश

उद्देश्य:

निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जहां खाद्य असुरक्षा एक चुनौती बनी हुई है,तंबाकू की खपत  कई चिंताएं पैदा करती है। यह समीक्षा सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण और इसके प्रभावों के साथ धूम्ररहित तंबाकू (एसएलटी) के उपयोग को जोड़ने वाले उपलब्ध वैश्विक साक्ष्यों की जांच करती है।

अध्ययन रचना

जनवरी 2000 से दिसंबर 2020 तक PUBMED और SCOPUS से निकाले गए लेखों की व्यवस्थित समीक्षा।

अध्ययन व्यवस्था

SLT और पोषण संबंधी कारकों, अर्थार्त (BMI) बीएमआई, कुपोषण, एनीमिया, जन्म के खराब परिणाम और पाचन संबंधी विकारों के बीच संबंध प्रदर्शित करने वाले अध्ययन शामिल हैं। व्यवस्थित साक्ष्य समीक्षा करने के लिए व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण (PRISMA) दिशानिर्देशों के लिए पसंदीदा रिपोर्टिंग विषय का पालन किया गया है।

प्रतिभागियों

अंत में व्यवस्थित समीक्षा में कुल चौंतीस अध्ययनों का उपयोग किया गया, जिसमें क्रॉस-सेक्शनल (इकतीस) और कोहोर्ट (तीन) शामिल थे।

परिणाम:

(SLT) धुंआ रहित तंबाकू के उपयोग से शरीर के वजन, स्वाद में परिवर्तन, खराब मौखिक स्वास्थ्य और फलों और सब्जियों की खपत पर भारी प्रभाव पड़ता है जिससे कुपोषण होता है। SLT के मात्र उपयोग से न केवल एनीमिया होता है बल्कि जन्म के परिणाम भी बाधित होते हैं। अध्ययनों में SLT उपयोगकर्ताओं के बीच पाचन सम्बन्धी लक्षण और पित्त की पथरी की बीमारी का बढ़ता जोखिम भी अच्छी तरह से प्रलेखित है।

निष्कर्ष:

समीक्षा SLT के उपयोग और खराब पोषण संबंधी परिणामों के बीच संबंधों पर प्रकाश डालती है। समग्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए तम्बाकू नियंत्रण प्रयासों को सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण के साथ जोड़ा जाना चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण हस्तक्षेप में निवेश के साथ सामुदायिक स्तर पर खाद्य और पोषण सुरक्षा को बढ़ाने के साथ (SLT) तम्बाकू छुड़वाने के लिए उपयुक्त प्रणाली का पता लगाने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

संकेत शब्द : बी एम आई(BMI); खाद्य असुरक्षा; पाचन सम्बन्धी विकार ; पोषण; धुंआ रहित तंबाकू।

ABSTRACT

Objective: Tobacco consumption among low- and middle-income countries where food insecurity remains a challenge poses several concerns. This review examines the available global evidence linking smokeless tobacco (SLT) use with public health nutrition and its implications.

Design: Systematic review of articles extracted from PubMed and Scopus from January 2000 to December 2020.

Setting: Included studies that demonstrated the relationship between SLT and nutrition-related factors, that is, BMI, malnutrition, anemia, poor birth outcomes and metabolic disorders. Preferred Reporting Items for Systematic Reviews and Meta-Analysis (PRISMA) guidelines have been followed to conduct the systematic evidence review.

Participants: A total of thirty-four studies were finally used in the systematic review, which included cross-sectional (thirty-one) and cohort (three).

Results: SLT use has a huge impact on body weight, alteration in taste, poor oral health, and consumption of fruits and vegetables leading to malnutrition. Maternal use of SLT not only leads to anemia but also hampers birth outcomes. Increased risk of metabolic syndrome and gallstone disease among SLT users are also well documented in the studies.

Conclusion: The review highlights the linkages between SLT usage and poor nutritional outcomes. Tobacco control efforts should be convergent with public health nutrition to achieve overall health benefits. Attention is also required to explore suitable mechanisms for SLT cessation combined with enhancing food and nutrition security at the community level in sync with investments in public health nutrition intervention.

Keywords: BMI; Food insecurity; Metabolic disorders; Nutrition; Smokeless tobacco.

 

 

धुआँ रहित तंबाकू का उपयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण: एक वैश्विक व्यवस्थित समीक्षा

Smokeless Tobacco Use and Public Health Nutrition: A Global Systematic Review. Public Health Nutrition,

Shikha Saxena 1Prashant Kumar Singh 1Lucky Singh 2Shekhar Kashyap 3Shalini Singh 1

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/35618706/

सारांश

उद्देश्य:

निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जहां खाद्य असुरक्षा एक चुनौती बनी हुई है,तंबाकू की खपत  कई चिंताएं पैदा करती है। यह समीक्षा सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण और इसके प्रभावों के साथ धूम्ररहित तंबाकू (एसएलटी) के उपयोग को जोड़ने वाले उपलब्ध वैश्विक साक्ष्यों की जांच करती है।

अध्ययन रचना

जनवरी 2000 से दिसंबर 2020 तक PUBMED और SCOPUS से निकाले गए लेखों की व्यवस्थित समीक्षा।

अध्ययन व्यवस्था

SLT और पोषण संबंधी कारकों, अर्थार्त (BMI) बीएमआई, कुपोषण, एनीमिया, जन्म के खराब परिणाम और पाचन संबंधी विकारों के बीच संबंध प्रदर्शित करने वाले अध्ययन शामिल हैं। व्यवस्थित साक्ष्य समीक्षा करने के लिए व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण (PRISMA) दिशानिर्देशों के लिए पसंदीदा रिपोर्टिंग विषय का पालन किया गया है।

प्रतिभागियों

अंत में व्यवस्थित समीक्षा में कुल चौंतीस अध्ययनों का उपयोग किया गया, जिसमें क्रॉस-सेक्शनल (इकतीस) और कोहोर्ट (तीन) शामिल थे।

परिणाम:

(SLT) धुंआ रहित तंबाकू के उपयोग से शरीर के वजन, स्वाद में परिवर्तन, खराब मौखिक स्वास्थ्य और फलों और सब्जियों की खपत पर भारी प्रभाव पड़ता है जिससे कुपोषण होता है। SLT के मात्र उपयोग से न केवल एनीमिया होता है बल्कि जन्म के परिणाम भी बाधित होते हैं। अध्ययनों में SLT उपयोगकर्ताओं के बीच पाचन सम्बन्धी लक्षण और पित्त की पथरी की बीमारी का बढ़ता जोखिम भी अच्छी तरह से प्रलेखित है।

निष्कर्ष:

समीक्षा SLT के उपयोग और खराब पोषण संबंधी परिणामों के बीच संबंधों पर प्रकाश डालती है। समग्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए तम्बाकू नियंत्रण प्रयासों को सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण के साथ जोड़ा जाना चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण हस्तक्षेप में निवेश के साथ सामुदायिक स्तर पर खाद्य और पोषण सुरक्षा को बढ़ाने के साथ (SLT) तम्बाकू छुड़वाने के लिए उपयुक्त प्रणाली का पता लगाने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

संकेत शब्द : बी एम आई(BMI); खाद्य असुरक्षा; पाचन सम्बन्धी विकार ; पोषण; धुंआ रहित तंबाकू।

ABSTRACT

Objective: Tobacco consumption among low- and middle-income countries where food insecurity remains a challenge poses several concerns. This review examines the available global evidence linking smokeless tobacco (SLT) use with public health nutrition and its implications.

Design: Systematic review of articles extracted from PubMed and Scopus from January 2000 to December 2020.

Setting: Included studies that demonstrated the relationship between SLT and nutrition-related factors, that is, BMI, malnutrition, anemia, poor birth outcomes and metabolic disorders. Preferred Reporting Items for Systematic Reviews and Meta-Analysis (PRISMA) guidelines have been followed to conduct the systematic evidence review.

Participants: A total of thirty-four studies were finally used in the systematic review, which included cross-sectional (thirty-one) and cohort (three).

Results: SLT use has a huge impact on body weight, alteration in taste, poor oral health, and consumption of fruits and vegetables leading to malnutrition. Maternal use of SLT not only leads to anemia but also hampers birth outcomes. Increased risk of metabolic syndrome and gallstone disease among SLT users are also well documented in the studies.

Conclusion: The review highlights the linkages between SLT usage and poor nutritional outcomes. Tobacco control efforts should be convergent with public health nutrition to achieve overall health benefits. Attention is also required to explore suitable mechanisms for SLT cessation combined with enhancing food and nutrition security at the community level in sync with investments in public health nutrition intervention.

Keywords: BMI; Food insecurity; Metabolic disorders; Nutrition; Smokeless tobacco.

 

भारत में वृद्ध वयस्कों में धूम्रपान रहित तंबाकू की खपत की मात्रा का अनुमान लगाना

Estimating the quantity of smokeless tobacco consumption among older adults in India

Lucky Singha Pallavi Sinhab Arpit Singhb Prashant Kumar Singhb Shalini Singhb

 

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2213398422001920

 

सारांश

प्रस्तावना

विश्व स्तर पर भारत में धूम्ररहित तंबाकू (SLT) के उपयोगकर्ता सबसे अधिक हैं। हालांकि, अध्ययनों में (SLT) के उपयोग की व्यापकता और निर्धारकों की जांच की गयी है, लेकिन ऐसे कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जो उपयोग किए गए (SLT) धूम्ररहित तम्बाकू पदार्थों  की मात्रा की जांच को दर्शाता हो।

पद्धति

इस अध्ययन में लोंगिटूडिनल स्टडी ऑफ़ इंडिया  (LASI) के आकड़ो का उपयोग किया गया है ,जोकि बहुस्तरीय वर्गीकृत क्षेत्रीय प्रायिकता क्लस्टर चयन प्रक्रिया पर आधारित सर्वेक्षण है। सबसे पहले, LASI डेटा का उपयोग करते हुए दैनिक औसत धूम्ररहित तंबाकू खपत (ग्राम में) की गणना की गई है । क्रमशः जनसँख्या के अनुमानित आकड़े  26वें संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक जनसंख्या अनुमानों का और ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS-2) और LASI सर्वे से वर्तमान धूम्ररहित तंबाकू  के  उपयोग की व्यापकता दर का उपयोग करते हुए, भारत की 45 वर्ष और अधिक की जनसँख्या के लिए धूम्र रहित तम्बाकू के सेवन के स्वरुप का आंकलन किया है

परिणाम

अधिक आयु के  वयस्कों के बीच वर्तमान  उपयोग का प्रचलन 17.2% था, जबकि SLT का उपयोग पुरुषों (20.8%) के बीच अधिक है। औसतन, एक वृद्ध वयस्क दैनिक आधार पर 1.01 ग्राम SLT का सेवन करता है। LASI और GATS-2 के आंकड़ों  से की गयी गणना के अनुसार  धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं द्वारा उपभोग की जाने वाली धूम्र रहित तंबाकू  मात्रा की सीमा 65,000 किलोग्राम से 85,000 किलोग्राम प्रतिदिन के बीच है, जबकि वार्षिक खपत क्रमशः 23 मिलियन किलोग्राम से 32 मिलियन किलोग्राम तक होती है।

निष्कर्ष 

भारत में तम्बाकू छुड़वाने सम्बन्धी सेवाओं का प्रसार  धूम्र रहित  बोझ को कम करने और छोड़ने के इरादे की दरों में सुधार करने में फायदेमंद हो सकता है I

संकेत शब्द : तम्बाकू ,धुआँरहित, तम्बाकू, आबादी,भारत

 

ABSTRACT

Globally, smokeless tobacco (SLT) users are highest in India. Whilst, studies examined prevalence and determinants of SLT use, no evidence exists which examined the quantity of SLT consumed.

Methods

Study utilized national representative data from the Longitudinal Aging Study in India (LASI) which adopted a multistage stratified area probability cluster sampling design. First, we computed the average SLT consumption per day (in grams) from the LASI data. Consecutively, we further utilized the projected population approximations from the 26th round of the official United Nations population estimates and prevalence rate of current SLT use from the Global Adult Tobacco Survey (GATS-2) and LASI Survey, separately to estimate SLT use pattern for the entire Indian population aged 45 or above.

Results

The prevalence of current SLT use among older adults was 17.2% wherein the SLT use is higher among men (20.8%). On average, an older adult consumes 1.01 g of SLT on a daily basis. The range of SLT quantity consumed by users’ according to the LASI and GATS-2 prevalence, varies from 65,000 kg to 85,000 kg per day whereas, annual consumption ranges from 23 million kilograms to 32 million kilograms, respectively.

Conclusion

The development of SLT cessation services examining the quantitative aspects of SLT use would be beneficial in tackling the high SLT burden in India and improving the rates of intention to quit.

Keywords: Tobacco, Smokeless tobacco, population, India

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प्रजनन आयु की महिलाओं में सामाजिक वांछनीयता और धूम्र रहित तंबाकू के उपयोग की अल्प-रिपोर्टिंग: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से प्राप्त साक्ष्य

Social desirability and under-reporting of smokeless tobacco use among reproductive age women: Evidence from National Family Health Survey

PrashantKumarSinghaPankhuriJainaNishikantSinghaLuckySinghbChandanKumarcAmitYadavdS.V. Subramanian, Shalini Singh

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2352827322002361

 

प्रमुखताएँ

  • सर्वेक्षण के दौरान तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति महिलाओं के बीच धूम्ररहित तंबाकू (SLT) के उपयोग की रिपोर्टिंग को प्रभावित करती है।
  • साक्षात्कार के दौरान पति की उपस्थिति पत्नी द्वारा एसएलटी उपयोग रिपोर्टिंग पर नकारात्मक प्रभाव डालती है I
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने सर्वेक्षण के समय एक वयस्क महिला की उपस्थिति में कम SLT उपयोग की सूचना दी।
  • वर्तमान में भारत में महिलाओं के बीच SLT के उपयोग का बहुत कम रिपोर्ट किया गया है।
  • चूंकि महिलाएं अपने तम्बाकू उपयोग की रिपोर्ट करने में असमर्थ हैं, इसलिए वे तम्बाकू छुड़वाने के लिए आवश्यक सहायता प्राप्त करने में असमर्थ हो सकती हैं।                                 

सारांश  

 

 

परिचय

इस अध्ययन में परिकल्पना की गयी है कि सर्वेक्षण के दौरान अन्वेषक और महिला प्रतिवादी के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति में भारतीय महिलाएं (गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं सहित) धूम्ररहित तंबाकू (SLT) के सेवन की अल्प-रिपोर्टिंग करती हैं ।

 

पद्यति

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के क्रॉस-सेक्शनल आंकड़ों का विश्लेषण 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं के बीच एसएलटी उपयोग के लिए किया गया था। मल्टीवेरिएट लॉजिस्टिक रिग्रेशन प्रयोग करते हुए महिला उत्तरदाताओं द्वारा उनके पति और अन्य पुरुष या महिला वयस्कों की उपस्थिति में SLT उपयोग रिपोर्टिंग की बाधाओं की जांच की गयी है।

परिणाम

साक्षात्कार के दौरान किसी भी  अन्य की  उपस्थिति से महिलाओं द्वारा SLT उपयोग रिपोर्टिंग में काफी भिन्नता पायी गयी । विश्लेषण से पता चलता है कि उन महिलाओं के बीच जो न तो गर्भवती थीं और न ही स्तनपान कराने वाली थी SLT उपयोग की रिपोर्टिंग की संभावना जब उनका साक्षात्कार उनके पति की उपस्थिति में किया गया  , 20.6% कम थीं ऐसी महिलाओं की तुलना में जिनका साक्षात्कार अकेले किया गया था  I इसी तरह, गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं में SLT उपयोग की रिपोर्टिंग की संभावना 16.5% कम थी जब उनका साक्षात्कार किसी अन्य वयस्क महिला की उपस्थिति में किया गया ऐसी महिलाओं की तुलना में जिनका साक्षात्कार अकेले किया गया था | मध्य और पश्चिमी भारत में महिलाओं द्वारा एस एल टी के उपयोग की अल्प-रिपोर्टिंग की संभावना अधिक थी|

निष्कर्ष

इस अध्ययन का तर्क है कि  उपलब्ध सर्वेक्षण के प्रमाण भारत में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं सहित  महिलाओं  द्वारा  तम्बाकू के उपयोग के आंकड़ों को गलत ढंग से पेश करते हैं । सामाजिक वांछनीयता या सर्वेक्षण साक्षात्कार के दौरान किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति के कारण, वे उत्तरदाता जो अपने तम्बाकू उपयोग की स्थिति की रिपोर्ट नहीं करते हैं, उनके सफलतापूर्वक तम्बाकू छुड़वाने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं प्रदान करने की संभावना अधिक है | बेहतर रिपोर्टिंग और जनसंख्या स्वास्थ्य अनुमान सुनिश्चित करने के लिए साक्षात्कार के दौरान किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति को टालने के लिए सर्वेक्षण पद्धति को मजबूत किया जाना चाहिए।

संकेत शब्द  : धुआँरहित तम्बाकू, सामाजिक वांछनीयता, महिलाएं;  सर्वेक्षण पद्धति, भारत; डी एच एस; एन एफ एच एस

                                                             

Highlights

  • Presence of third person during survey affects smokeless tobacco (SLT) use reporting among women.
  • Husband’s presence during interview negatively associated with SLT use reporting by wife.
  • Pregnant and breastfeeding women report lower SLT use in the presence of an adult female at the time of survey.
  • Present estimates of SLT use among women is grossly underreported in India.
  • Since women are unable to report their tobacco use, they may be unable to seek essential support for tobacco cessation.

 

 

ABSTRACT

Introduction

This study hypothesizes that the presence of a third person during the interaction between the survey investigator and the woman respondent leads to underreporting of smokeless tobacco (SLT) use by Indian women, including pregnant and breastfeeding women.

 

Methods

Cross-sectional data from the National Family Health Survey conducted in 2015–16 was analyzed for SLT use among women aged 15–49. Multivariate logistic regression examined the odds of SLT use reporting by women respondents in the presence of their husbands and other male or female adults.

 

Results

SLT use reporting by women significantly varied by the presence of someone during the interview. The analysis shows that the odds of reporting SLT use among women who were neither pregnant nor lactating was 20.6% lower when they were interviewed in the presence of their husbands than when they were interviewed alone. Similarly, compared to those interviewed alone, the odds of women reporting SLT use was 16.5% lower among pregnant and breastfeeding women interviewed in the presence of any adult female. The odds of women under-reporting SLT use were higher in Central and Western India.

 

Conclusions

This study argues that the current survey estimates misconstrue the authentic prevalence of tobacco use among women in India, including pregnant and lactating women. Due to social desirability or the presence of a third person during the survey interview, those respondents who do not report their tobacco use status are also more likely to forego essential support for successful tobacco cessation. Survey methodology must be strengthened to avert the presence of a third person during the interview to ensure better reporting and population health estimates.

Keywords: Smokeless tobacco, social desirability, Women, Survey, methodology, India, DHS, NFHS

 

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स्तनपान के दौरान धूम्रपान और धूम्रपान रहित तम्बाकू के उपयोग की व्यापकता: 78 निम्न-आय और मध्यम-आय वाले देशों में 0.32 मिलियन नमूना महिलाओं के आधार पर एक क्रॉस सेक्शनल माध्यमिक द्वितीय क्रम के आंकड़ों का विश्लेषण

Prevalence of smoking and smokeless tobacco use during breastfeeding: A cross-sectional secondary data analysis based on 0.32 million sample women in 78 low-income and middle-income countries.

Prashant Kumar Singh 1Lucky Singh 2Fernando C Wehrmeister 3Nishikant Singh 1Chandan Kumar 4Ankur Singh 5Dhirendra N Sinha 6Zulfiqar A Bhutta 7 8Shalini Singh 1

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/36159043/

सारांश

पृष्ठभूमि:

उच्च आय वाले देशों में प्रसवोत्तर अवधि के दौरान धूम्रपान और धूम्रपान रहित तंबाकू के  उपयोग का काफी अध्ययन किया गया है, जबकि निम्न-आय और मध्यम-आय वाले देशों में (LMIC)  अध्ययन में साक्ष्यों  की कमी होती है।

पद्यति

इस क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन में हमने जनवरी 2010 और दिसंबर 2019 के बीच स्तनपान कराने वाली महिलाओं के बीच तंबाकू के उपयोग का अध्ययन करने के लिए 78 LMIC में आयोजित डेमोग्राफिक एंड हेल्थ सर्वे (DHS) और मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे (MICS) के 0.32  मिलियन  का उपयोग किया। धूम्रपान और धूम्रपान रहित तंबाकू के उपयोग की आयु-मानकीकृत व्यापकता की गणना  की गयी और 78 LMIC के लिए 95% कॉन्फिडेंस इंटरवल (CI) के साथ प्रस्तुत किया गया। संयुक्त  और WHO क्षेत्रों के लिए आकड़े -प्रभाव मेटा-विश्लेषण का उपयोग करके प्राप्त किए गए थे। बहुस्तरीय मॉडलिंग का उपयोग करके प्रासंगिक कारकों को समझने के लिए देश-स्तर और समुदाय-स्तर के विचरण को भी निर्धारित किया गया था।

निष्कर्ष:

LMIC में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के बीच किसी भी तंबाकू के प्रयोग  3.61% (95% CI 3.53-3.70) था; अमेरिका के क्षेत्रों में सबसे निम्नतम  (1.44%, 1.26-1.63) और दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में उच्चतम (6.13%, 6.0-6.27) । धूम्रपान का प्रयोग संयुक्त रूप से 1.16% (1.11-1.21) था  जबकि पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में यह आकड़े उच्चतम (4.27%, 3.88-4.67) और अफ्रीकी क्षेत्र में सबसे कम (0.81%, 0.76-0.86) थे|  धूम्र रहित तंबाकू के उपयोग संयुक्त रूप से 2.56% (2.49-2.63) था जबकि  दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र (4.92%, 4.80-5.04) में यह आकड़े उच्चतम थे| LMIC में निरक्षर और गरीब महिलाओं पर तम्बाकू के उपयोग का भारी बोझ है।

व्याख्या /विवेचन

LMIC में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के बीच धूम्रपान और धूम्रपान रहित तम्बाकू का प्रचलन विभिन्न WHO क्षेत्रों में काफी भिन्न है। अध्ययन के क्रॉस-सेक्शनल रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए, परिणामों की व्याख्या करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है। माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाने और LMIC में स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित योजनाओं के माध्यम से तम्बाकू के उपयोग को कम करना महत्वपूर्ण है।

संकेत शब्द  : स्तनपान; स्तनपान कराने वाली महिलाएं; कम आय और मध्यम आय वाले देश; धुंआ रहित तंबाकू; धूम्रपान; डब्ल्यू एच ओ एफ सी टी सी।

 ABSTRACT

Background: Smoking and smokeless tobacco use during the postpartum period is well studied in high-income countries, whereas low-income and middle-income countries (LMICs) lack evidence.

Methods: In this cross-sectional study we used data from the Demographic and Health Surveys (DHS) and Multiple Indicator Cluster Surveys (MICS) conducted in 78 LMICs between January 2010 and December 2019 to study tobacco use among 0.32 million sample lactating women. Age-standardized prevalence of smoking and smokeless tobacco use was estimated and presented with a 95% Confidence Interval (CI) for 78 LMICs. Pooled estimates overall and by WHO regions were obtained using random-effects meta-analyses. Country-level and community-level variance to understand contextual factors was also quantified using multilevel modelling.

Findings: Pooled prevalence of any tobacco use among breastfeeding women in LMICs was 3.61% (95% CI 3.53-3.70); with the lowest prevalence in regions of the Americas (1.44%, 1.26-1.63) and the highest in the Southeast Asia region (6.13%, 6.0-6.27). The pooled prevalence of tobacco smoking was reported to be 1.16% (1.11-1.21), with the highest prevalence in the Eastern Mediterranean region (4.27%, 3.88-4.67) and the lowest in the African region (0.81%, 0.76-0.86). The pooled prevalence of smokeless tobacco use was reported to be 2.56% (2.49-2.63), with the highest prevalence in the Southeast Asia region (4.92%, 4.80-5.04). Illiterate and poor women in LMICs bore the enormous burden of tobacco use.

Interpretation: The prevalence of smoking and smokeless tobacco uses among lactating women in LMICs varied considerably across different WHO regions. Considering the cross-sectional design of the study, caution is required while interpreting the results. To improve mothers’ and children’s health and nutrition outcomes and reduce health inequalities in LMICs, reducing tobacco use through evidence-based interventions is critical.

Keywords: Breastfeeding; Lactating women; Low-income and middle-income countries; Smokeless tobacco; Smoking; WHO FCTC.

 

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भारत में वयस्क आबादी में उच्च रक्तचाप पर शराब, धूम्रपान और धूम्ररहित तंबाकू के उपयोग का मिश्रित प्रभाव: राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन

Mixed Effect of Alcohol, Smoking, and Smokeless Tobacco Use on Hypertension among Adult Population in India: A Nationally Representative Cross-Sectional Study.

Prashant Kumar Singh 1 2Ritam Dubey 1Lucky Singh 3Nishikant Singh 1Chandan Kumar 4Shekhar Kashyap 5Sankaran Venkata Subramanian 6 7Shalini Singh 2 8

 https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/35328927/

 

सारांश

भारत में वयस्कों में उच्च रक्तचाप के जोखिम के मामलों में जहाँ  पर्याप्त वृद्धि हुई है वहीँ  कई पदार्थों के सेवन के संबंध में बहुत  ही कम  साक्ष्य उपलब्ध हैं । यह अध्ययन भारत की वयस्क जनसंख्या  में शराब, तम्बाकू धूम्रपान और धूम्रर हित तम्बाकू के उपयोग की पारस्परिक रूप से विशेष और मिश्रित खपत के स्वरूप और उच्च रक्तचाप के साथ इनके सम्बन्ध का आंकलन करता है |  राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-2016)  से लिए गए पुरुषों और महिलाओं के राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शक आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में 140 mmHg (सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर) और 90 mmHg (डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर) से ऊपर के क्लिनिकल ब्लड प्रेशर माप को उच्च रक्तचाप माना गया। मल्टीवेरिएट बाइनरी लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल का उपयोग करके शराब, तंबाकू धूम्रपान और धुआं रहित तंबाकू की पारस्परिक रूप से विशेष श्रेणियों और उच्च रक्तचाप के बीच संबंध की जांच की गई। गैर-उपभोगता पुरुषों की तुलना में धूम्ररहित तम्बाकू उपयोगकर्ताओं में शराब का दैनिक सेवन करने वालों में उच्च रक्तचाप की संभावना सबसे अधिक थी (ओ आर: 2.32, 95% सी आई: 1.99-2.71) |धूम्रपान करने वाली तथा धूम्ररहित तम्बाकू के साथ शराब का दैनिक सेवन करने वाली महिलाओं में गैर-उपभोगताओं की तुलना में उच्च रक्तचाप की संभावना क्रमशः 71% (ओ आर: 1.71, 95% सी आई: 1.14-2.56) और 51% (ओ आर: 1.51, 95% सी आई: 1.25-1.82) अधिक थी। जनसँख्या में उच्च रक्तचाप के बोझ को कम करने के लिए एकीकृत और केंद्रित कार्यक्रम की आवश्यकता है जोकि शराब और तम्बाकू सम्बंधित व्यवहार को केंद्रबिंदु में रखे|

संकेत शब्द: भारत; शराब; उच्च रक्तचाप; धुंआ रहित तंबाकू; धूम्रपान।

ABSTRACT

Sporadic evidence is available on the association of consuming multiple substances with the risk of hypertension among adults in India where there is a substantial rise in cases. This study assesses the mutually exclusive and mixed consumption patterns of alcohol, tobacco smoking and smokeless tobacco use and their association with hypertension among the adult population in India. Nationally representative samples of men and women drawn from the National Family and Health Survey (2015-2016) were analyzed. A clinical blood pressure measurement above 140 mmHg (systolic blood pressure) and 90 mmHg (diastolic blood pressure) was considered in the study as hypertension. Association between mutually exclusive categories of alcohol, tobacco smoking and smokeless tobacco and hypertension were examined using multivariate binary logistic regression models. Daily consumption of alcohol among male smokeless tobacco users had the highest likelihood to be hypertensive (OR: 2.32, 95% CI: 1.99-2.71) compared to the no-substance-users. Women who smoked, and those who used any smokeless tobacco with a daily intake of alcohol had 71% (OR: 1.71, 95% CI: 1.14-2.56) and 51% (OR: 1.51, 95% CI: 1.25-1.82) higher probability of being hypertensive compared to the no-substance-users, respectively. In order to curb the burden of hypertension among the population, there is a need for an integrated and more focused intervention addressing the consumption behavior of alcohol and tobacco.

Keywords: India; alcohol; hypertension; smokeless tobacco; smoking.

 

गैर-संकेत वर्गीकरण व बहु रूपों  का एक व्यापक मेटा-विश्लेषण, जो पूर्ववर्ती घावों और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़ा हुआ है

A comprehensive meta-analysis of non-coding polymorphisms associated with precancerous lesions and cervical cancer

Agneesh Pratim Das 1Sandeep Saini 1Subhash M Agarwal 2                                                                   

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/35227837/

                                                                         सारांश

उद्देश्य: गर्भाशय  कैंसर से संबंधित जीन्स  के गैर-कोडिंग क्षेत्रों में मौजूद बहु रूपताओं के जोखिम का अध्ययन करना।

तरीके: एकल न्यूक्लियोटाइड बहुरूपता और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से सम्बंधित  अनुसंधान  साहित्य की पहचान करने के लिए पबमेड डेटाबेस को बड़े पैमाने पर टेक्स्ट-माइनिंग तकनीकों का उपयोग करके खोजा गया था। जून 2020 तक प्रकाशित केस-कंट्रोल अध्ययनों पर चयन मानदंडों को पूरा करने वाले मेटा-विश्लेषण के लिए विचार किया गया था I प्रत्येक केस-कंट्रोल अध्ययन के भीतर बहुरूपताओं को ज़ेनोटाइप  तथ्यों  की उपस्थिति के लिए जाँचा गया और फिर गर्भाशय ग्रीवा की पूर्ववर्ती और कैंसर स्थितियों के आधार पर समूहों में विभाजित किया गया। विषम अनुपात और 95% विश्वास अंतराल (CI) का उपयोग विभिन्न आनुवंशिक संरचना(allele, dominant, recessive, heterozygous and homozygous ) की मदद से बहुरूपताओं के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए किया गया था। पी-मूल्य का उपयोग करके प्रकाशन पूर्वाग्रह और सांख्यिकीय महत्व के साथ विषमता की भी जाँच की।

परिणाम: मेटा-विश्लेषण के लिए 37,123 मामलों और 39,641 नियंत्रण डेटा वाले 48 अद्वितीय गैर-कोडिंग एसएनपी को कवर करने वाले 120 शोध पत्रों पर विचार किया गया। जीनोटाइप डेटा को क्रमशः 43, 8 और 11 एसएनपी के लिए कैंसर, प्रीकैंसर और “कैंसर + प्रीकैंसर” समूहों में वर्गीकृत किया गया था। मेटा-विश्लेषण ने कैंसर और “कैंसर + प्रीकैंसर” समूहों में महत्वपूर्ण 21 और 1 एसएनपी की पहचान की। सभी बहुरूपताओं में, rs1143627 (IL1B), rs1800795 (IL6), rs1800871 (IL10), rs568408 (IL12A), rs3312227 (IL12B), rs2275913 (IL17A), rs5742909 (CTLA4), rs1800629 (TNFα6), और rs10PY1C46) पांच आनुवंशिक मॉडल में से कम से कम तीन में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ  पाया गया।

निष्कर्ष: हमने इंटरल्यूकिन्स (ILs), ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (TNF), इंटरफेरॉन (IFN) और अन्य प्रतिरक्षा संबंधी जीन जैसे टोल जैसे रिसेप्टर (TLR), साइटोटोक्सिक टी-लिम्फोसाइट संबद्ध प्रोटीन (जैसे विभिन्न साइटोकिन्स) के अनुरूप संभावित गैर-कोडिंग SNPs की पहचान की। CTLA) और मैट्रिक्स मेटेलोप्रोटीनेज (MMP), बढ़े हुए पूल्ड या इस मेटा-विश्लेषण के साथ महत्वपूर्ण है, जो सर्वाइकल कार्सिनोजेनेसिस में प्रतिरक्षा संबंधी जीन के जोखिम संघ की ओर इशारा करता है।

संकेत शब्द : सर्वाइकल कैंसर; साइटोकिन; प्रतिरक्षा तंत्र; बहुरूपता; मेटा-विश्लेषण।

 

                                                                         ABSTRACT

Objectives: To study the risk of polymorphisms present in the non-coding regions of genes related with cervical cancer.

Methods: The PubMed database was extensively searched using text-mining techniques to identify literature containing the association of single nucleotide polymorphisms and cervical cancer. Case-control studies published till June 2020 were considered for the meta-analysis if they fulfilled the selection criteria. The polymorphisms within each case-control study were checked for the presence of genotype data and then divided into groups based on the precancerous and cancerous conditions of the cervix. Odds ratio and 95% confidence intervals (CI) were used to study the effects of polymorphisms with the help of different genetic models (allele, dominant, recessive, heterozygous and homozygous). Also checked heterogeneity along with publication bias and statistical significance using the p-value.

Results: 120 papers covering 48 unique non-coding SNPs having 37,123 cases and 39,641 control data was considered for the meta-analysis. The genotype data was categorized into Cancer, Precancer and “Cancer + Precancer” groups, for 43, 8 and 11 SNPs respectively. The meta-analysis identified 21 and 1 SNPs as significant in the Cancer and “Cancer + Precancer” groups. Among all the polymorphisms, rs1143627 (IL1B), rs1800795 (IL6), rs1800871 (IL10), rs568408 (IL12A), rs3312227 (IL12B), rs2275913 (IL17A), rs5742909 (CTLA4), rs1800629 (TNFα), and rs4646903 (CYP1A1) were found to increase risk of cervical cancer in at least three of the five genetic models.

Conclusion: We identified potential non-coding SNPs corresponding to various cytokines like interleukins (ILs), tumor necrosis factor (TNF), interferon (IFN) and other immune related genes like toll like receptor (TLR), cytotoxic T-lymphocyte associated protein (CTLA) and matrix metalloproteinase (MMP), as significant with increased pooled OR in this meta-analysis pointing to risk association of the immune-related genes in cervical carcinogenesis.

Keywords: Cervical cancer; Cytokine; Immune system; Polymorphism; meta-analysis.

 

 

 

ADMET, मशीन लर्निंग, आणविक डॉकिंग और एक गतिशील दृष्टिकोण को एकीकृत करके EGFR डबल म्यूटेंट (T790M/L858R) के खिलाफ प्राकृतिक उत्पाद अवरोधकों की कम्प्यूटेशनल पहचान

Computational identification of natural product inhibitors against EGFR double mutant (T790M/L858R) by integrating ADMET, machine learning, molecular docking and a dynamics approach†

Subhash M. Agarwal,  Prajwal Nandekar,‡§ and Ravi Saini

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC9170516/

 

                                                                     सारांश

फेफड़े के कैंसर के उपचार में दवा प्रतिरोधक क्षमता  को संबोधित करने के लिए दोहरे  उत्परिवर्तित बाह्यत्वचा वृद्धि कारक प्राप्तकर्ता  एक नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इसलिए, T790M/L858R (TMLR) प्रतिरोधी उत्परिवर्तित क्षमता  के खिलाफ नए अवरोधकों की खोज विश्व स्तर पर जारी है। वर्तमान अध्ययन में, विभिन्न लिगैंड और संरचना-आधारित तकनीकों को नियोजित करके विभिन्न प्राकृतिक उत्पाद संरचना  से  लगभग 150 000 अणुओं की जांच की गई। प्रारंभ में, इस संरचना  को दवा जैसे अणुओं की पहचान करने के लिए शुद्ध  किया गया था, जो कैंसर विरोधी गतिविधि होने की उच्च संभावना वाले अणुओं की पहचान करने के लिए यन्त्र द्वारा सीखने के  वर्गीकरण प्रतिमान  के अधीन थे। इसके साथ ही, विवश डॉकिंग के नियम त्रि-आयामी प्रोटीन-लिगैंड संरचना  से प्राप्त किए गए थे और उसके बाद, विवश डॉकिंग किया गया था, जिसके बाद HYDE बाइंडिंग एफिनिटी का मूल्यांकन  किया गया था। नतीजतन, सह-सघन  जटिल  बातचीत के समान तीन अणुओं का चयन किया गया और स्थिरता विश्लेषण के लिए 100 NS  आणविक गतिशीलता  के अधीन किया गया। 100 NS सिमुलेशन अवधि के लिए इंटरेक्शन विश्लेषण से पता चला है कि लीड सह-क्रिस्टल लिगैंड के रूप में Gln791 और Met793 के साथ संरक्षित हाइड्रोजन बॉन्ड इंटरैक्शन प्रदर्शित करते हैं। साथ ही, अध्ययन ने यह  संकेत दिया कि वाई-आकार के अणुओं को अनिवार्य रूप से  पसंद किया जाता है क्योंकि यह उन्हें दोनों ही स्थान  पर कब्जा करने में सक्षम बनाता है। MMGBSA की  अनिवार्य ऊर्जा आकलन से पता चला है कि अणुओं में मूल लिगैंड के लिए तुलनात्मक अनिवार्य ऊर्जा  होती है। वर्तमान अध्ययन ने प्राकृतिक उत्पादों से कुछ ADMET अनुयायी नेतृत्व  की पहचान को सक्षम किया है जो दोहरे उत्परिवर्तित दवा प्रतिरोधी EGFR को बाधित करने की क्षमता प्रदर्शित करते हैं।

 

 

 

                                                      

 

                                                                          ABSTACT

Double mutated epidermal growth factor receptor is a clinically important target for addressing drug resistance in lung cancer treatment. Therefore, discovering new inhibitors against the T790M/L858R (TMLR) resistant mutation is ongoing globally. In the present study, nearly 150 000 molecules from various natural product libraries were screened by employing different ligand and structure-based techniques. Initially, the library was filtered to identify drug-like molecules, which were subjected to a machine learning based classification model to identify molecules with a higher probability of having anti-cancer activity. Simultaneously, rules for constrained docking were derived from three-dimensional protein-ligand complexes and thereafter, constrained docking was undertaken, followed by HYDE binding affinity assessment. As a result, three molecules that resemble interactions similar to the co-crystallized complex were selected and subjected to 100 ns molecular dynamics simulation for stability analysis. The interaction analysis for the 100 ns simulation period showed that the leads exhibit the conserved hydrogen bond interaction with Gln791 and Met793 as in the co-crystal ligand. Also, the study indicated that Y-shaped molecules are preferred in the binding pocket as it enables them to occupy both pockets. The MMGBSA binding energy calculations revealed that the molecules have comparable binding energy to the native ligand. The present study has enabled the identification of a few ADMET adherent leads from natural products that exhibit the potential to inhibit the double mutated drug-resistant EGFR.

भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक कैंसर परीक्षण क्लिनिक में भाग लेने वाले शहरी झुग्गियों के  निवासियों के बीच तंबाकू का उपयोग: एक अनुभागीय अध्ययन

Tobacco use among urban slum dwellers attending a cancer screening clinic in the National Capital Region of India: a cross-sectional study

Suzanne T Nethan 1Dhirendra N Sinha 1Ashwini Kedar 2Vipin Kumar 3Shashi Sharma 4Roopa Hariprasad 5Ravi Mehrotra 6

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/34158834/

सारांश

पृष्ठभूमि: भारत में तंबाकू की खपत निवास के  स्थान (शहरी/ग्रामीण) के आधार पर भिन्न होती है। ‘शहरी झुग्गियों’ निवासियों के  विषय  में न्यूनतम, जानकारी मौजूद है। वर्तमान अध्ययन नोएडा, उत्तर प्रदेश (भारत) के  ऐसे व्यक्तियों के बीच तम्बाकू उपयोग के स्वरूप को ही  निर्धारित करता है।

पद्धति: दिसंबर 2016 और जून 2019 के बीच संस्थान की  क्लिनिक में आने वाले शहरी झुग्गियों के  निवासियों के बीच एक  अनुभागीय अध्ययन किया गया था। तंबाकू के  उपयोग के इतिहास के अलावा, प्रतिभागियों के  मूलभूत  जनसांख्यिकीय विवरण  दर्ज़ किया गया और मौखिक  परीक्षण किया गया । श्रेणीबद्ध तथ्यों  के लिए, विभिन्न मापदंडों के प्रतिशत की गणना की गई और मात्रात्मक तथ्यों  के लिए, वर्णनात्मक आंकड़ों की गणना की गई। ची-स्क्वायर या फिशर के सटीक परीक्षणों को दो श्रेणीबद्ध चर के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए नियोजित किया गया । तम्बाकू उपयोग और सामाजिक-जनसांख्यिकीय कारकों के बीच संबंध की ताकत का पता लगाने के लिए, अविभाज्य और बहुभिन्नरूपी  बाइनरी लॉजिस्टिक रिग्रेशन का उपयोग किया गया था।

परिणाम: 2,043 शहरी झुग्गी उत्तरदाताओं (602 पुरुष, 1441 महिला) में से, 15.0% (n = 308) वर्तमान में तंबाकू का सेवन करते हैं। बहुसंख्यक धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ता थे (दोनों पुरुषो और महिला)। पुरुषों में, खैनी (42.1%) और गुटखा (32.5%) और महिलाओं में गुल (36.1%) सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले तंबाकू उत्पाद थे।

निष्कर्ष: नोएडा शहरी झुग्गी आबादी के अधिकांश लोग परीक्षण क्लिनिक में धूम्ररहित तम्बाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू के रूप और उत्पाद-विशिष्ट खपत स्वरुप  में लिंग भिन्नता इंगित करती है कि शहरी मलिन बस्तियों-विशिष्ट सर्वेक्षणों का उपक्रम आवश्यक है। तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रमों में तम्बाकू उपयोगकर्ताओं के ऐसे उप समूहों को संबोधित करने वाली उपयुक्त रणनीतियाँ शामिल होनी चाहिए।

संकेत शब्द : भारत; नोएडा; मौखिक कैंसर; तंबाकू; शहरी झुग्गी बस्तियों।

 

 

 

                                                                  

ABSTRACT

 

Background: Tobacco consumption in India varies based on the place of residence (urban/rural). Minimal, exclusive information exists regarding the same for ‘urban slum’ dwellers. The current study determines the tobacco use pattern among such individuals in Noida, Uttar Pradesh (India).

Methods: A cross-sectional study was conducted among the urban slum residents visiting the institutional clinic between December 2016 and June 2019. Apart from tobacco history, routine recording of the basic demographic details and oral visual examination was carried out for the participants. For categorical data, the percentage of different parameters was calculated and for quantitative data, descriptive statistics were calculated. Chi-square or Fisher’s exact tests were employed to determine the association between the two categorical variables. To find the strength of association between tobacco use and the socio-demographic factors, univariate and multivariable binary logistic regression was used.

Results: Among 2,043 urban slum respondents (602 male, 1441 female), 15.0% (n = 308) currently consumed tobacco. The majority were smokeless tobacco (SLT) users (among both males and females). Among males, khaini (42.1%) and gutkha (32.5%) and among females gul (36.1%) were the most widely used tobacco products.

Conclusion: The majority of the Noida urban slum population attending the screening clinic consumed SLT. Gender variation in the tobacco form and product-specific consumption patterns indicates that the undertaking of urban slums-specific surveys is essential. Tobacco control programs must incorporate appropriate strategies addressing such subgroups of tobacco users.

Keywords: India; Noida; oral cancer; tobacco; urban slums.

 

 

सर्वाइकल पूर्व कैंसर घाव  की नकल करने वाला जन्मजात परिवर्तन क्षेत्र

Congenital Transformation Zone Mimicking Cervical Premalignant Lesion

Kavitha Dhanasekaran 1Sanjay Gupta 2Usha Ramakrishna 3Roopa Hariprasad 4

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/34602771/

 

 

                                                                         सारांश

परिचय: गर्भाशय ग्रीवा का जन्मजात परिवर्तन क्षेत्र (CTZ) एक गैर-नियोप्लास्टिक, दुर्लभ स्थिति है जो दूरबीन परीक्षण  पर उच्च-श्रेणी के घावों जैसी होती है जो नैदानिक भ्रांतियों  की ओर ले जाती है। केस का विवरण गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए एक  महिला की जांच की गई थी। एसिटिक एसिड का उपयोग कर दृश्य निरीक्षण किया गया जो  सकारात्मक था जिसके लिए आगे दूरबीन की जांच  के साथ मूल्यांकन किया गया था। उच्च श्रेणी की पूर्ववर्ती स्थिति जैसा दिखने वाला एक -सफेद घाव देखा गया था। टुकड़े की जांच कई जगह  से लिया गया था और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट ने स्क्वैमस एपिथेलियम की सतही परतों की बढ़ी हुई परिपक्वता के साथ पुरानी गर्भाशयग्रीवा शोथ का प्रदर्शन किया। घाव एंटीबायोटिक दवाओं के एक कोर्स के बाद भी फॉलो-अप  और  की जांच  पर बना रहा।

विचार-विमर्श  : CTZ को गर्भाशय के  पूर्व कैंसर  घावों से अलग करना मुश्किल हो सकता है। इस लेख का मुख्य उद्देश्य दूर बीन  की जांच  के ​​  इस रूपांतरण को समझने में मदद करना है।

निष्कर्ष: CTZ एक शारीरिक इकाई है और दूरबीन की जांच  पर सर्वाइकल कैंसर के पूर्व संकरे घावों के  लिए विभेदक निदान है

संकेत शब्द : कोलपोस्कोपी; जन्मजात परिवर्तन क्षेत्र; सर्वाइकल इंट्रापीथेलियल नियोप्लासिया CIN का विभेदक निदान।

 

 

 

 

 

 

 

                                                                         ABSTRACT

Introduction: Congenital transformation zone (CTZ) of the uterine cervix is a non-neoplastic, rare condition resembling high-grade lesions on Colposcope examination which leads to diagnostic dilemmas. Case Description A multiparous woman was screened for cervical cancer. Visual inspection using acetic acid was positive for which further evaluation with colposcopy was done. An aceto-white lesion resembling high-grade precancerous condition was seen. Punch biopsy was taken from multiple areas and the histopathology report demonstrated chronic cervicitis with increased maturation of the superficial layers of squamous epithelium. The lesion persisted on the follow-up colposcopy even after a course of antibiotics.

Discussion:  CTZ could be difficult to differentiate from cervical premalignant lesions. The main aim of this article is to help other colposcopes to understand this physiological variant.

Conclusion: The CTZ is a physiological entity and differential diagnosis for cervical premalignant lesions on colposcopy.

Keywords: Colposcopy; Congenital transformation zone; Differential diagnosis of cervical intraepithelial neoplasia.

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भारत में कैंसर परीक्षण में स्वास्थ्य पेशेवरों  के राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण के लिए एक लाभकारी तकनीक:एक विधि लेख

Leveraging Technology for Nation-Wide Training of Healthcare Professionals in Cancer Screening in India: a methods Article

Roshani Babu 1Kavitha Dhanasekaran 2Ravi Mehrotra 1Roopa Hariprasad 3

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/32130665/

­­­­­­­­­­­­­                                                       सारांश

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद -राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान परिषद  (ICMR-NICPR) 2017 से ऑनलाइन कैंसर परीक्षण  प्रशिक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम(ECHO) के माध्यम से चला  रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण द्वारा जारी परिचालित रूपरेखा  के अनुसार, स्वास्थ सेवा प्रदाता  (HCP) के विभिन्न संवर्गों के लिए एक 14-सप्ताह का पाठ्यक्रम तैयार किया गया था, जिसके माध्यम से उन्हें कैंसर परीक्षण  और जनसंख्या आधारित कैंसर परीक्षण  को लागू करने में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों का प्रशिक्षण दिया गया था। फिर, प्रतिभागियों को कैंसर परीक्षण तकनीकों में कौशल प्रदान करने के लिए एक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया। ऑनलाइन प्रशिक्षण और व्यक्तिगत  प्रशिक्षण के हाइब्रिड मॉडल का उपयोग करके आठ साथियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया है। हाइब्रिड मॉडल का उपयोग करते हुए कैंसर की जांच की गई, जिसमें ऑनलाइन   इको आदर्श के रूप में शामिल है, जिसके बाद व्यावहारिक प्रशिक्षण बड़े समूहों को प्रशिक्षित करने के लिए भारत जैसे आबादी वाले देशों में एक उपयुक्त आदर्श  प्रशिक्षण  स्वरुप  है ।

संकेत शब्द : कैंसर की रोकथाम; कैंसर की जांच; कैंसर स्क्रीनिंग प्रशिक्षण; स्वास्थ्य रक्षक सुविधाएं प्रदान करने वाले; जनसंख्या-आधारित परीक्षण ; परियोजना  इको; तकनीकी।

                                                              

 

 

 

 

 

 

 

                                                                       ABSTRACT

The Indian Council of Medical Research-National Institute of Cancer Prevention and Research (ICMR-NICPR) has been conducting online cancer screening training certificate courses since 2017. Thereafter, multiple cohorts have been trained successfully in cancer screening using the Extensions for Community Healthcare Outcomes (ECHO) platform. A 14-week course was designed for various cadres of healthcare professionals (HCP), through which they were trained in cancer screening and their roles and responsibilities in implementing the population-based cancer screening, as per the operational framework released by the Ministry of Health and Family Welfare. Then, a contact program was held to upskill the participants in cancer screening techniques. Eight cohorts have been successfully trained using the hybrid model of online training and hands-on training. Cancer screening conducted utilizing the hybrid model, consisting of the online ECHO model, followed by hands-on training is a suitable training model to train large cohorts, such as the one in populous countries like India.

Keywords: Cancer prevention; Cancer screening; Cancer screening training; Healthcare providers; Population-based screening; Project ECHO; Technology.

 

मिश्रित प्रशिक्षण दृष्टिकोण के माध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग में स्त्री रोग विशेषज्ञों का क्षमता निर्माण

Capacity Building of Gynecologists in Cancer Screening Through Hybrid Training Approach

Kavitha Dhanasekaran 1Roshni Babu 2Vipin Kumar 1Ravi Mehrotra 2Roopa Hariprasad 3

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31359375/

                                                                सारांश

कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम की सफलता के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों (HCP) को प्रशिक्षित करना सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। इस कठिन कार्य को संभव बनाने के लिए, राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (NICPR) द्वारा ECHO (Extension of Community Health Outcomes) (सामुदायिक स्वास्थ्य परिणामों का विस्तार) के ऑनलाइन ज्ञान साझा करने का उपकरण  और व्यक्तिगत प्रशिक्षण को मिलाकर एक मिश्रित प्रशिक्षण रचना को  प्रस्तावित किया गया था। इस लेख का मुख्य उद्देश्य कैंसर की रोकथाम में स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने में इस मिश्रित प्रशिक्षण की प्रभावशीलता पर हमारे अनुभव का प्रसार करना है। स्त्री रोग विशेषज्ञों के एक समूह को 14 सप्ताह के ऑनलाइन पाठ्यक्रम के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर की जांच में एक संरचित पाठ्यक्रम का उपयोग करके प्रशिक्षित किया गया था, इसके बाद तीन दिवसीय व्यक्तिगत प्रशिक्षण (ग्रुप ए) दिया गया था। इस मॉडल की प्रभावशीलता का विश्लेषण करने के लिए, स्त्री रोग विशेषज्ञों का एक समूह जो ऑनलाइन पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थे, उन्हें आमने-सामने प्रशिक्षण (समूह बी) के लिए नामांकित किया गया था। सभी प्रतिभागियों को पूर्व और प्रशिक्षण के बाद की प्रश्नावली और एक चित्रात्मक प्रश्नोत्तरी की पेशकश की गई। व्यक्तिगत प्रशिक्षण से पहले समूह बी की तुलना में समूह ए प्रतिभागियों को क्रमशः गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर स्क्रीनिंग में 60% और 40% अधिक ज्ञान था। हालांकि समूह बी ने प्रशिक्षण के बाद ज्ञान में 51% की वृद्धि का प्रदर्शन किया, समूह ए ने बेहतर ज्ञान प्राप्ति का प्रदर्शन करते हुए चित्रात्मक प्रश्नोत्तरी में समूह बी की तुलना में 26% बेहतर प्रदर्शन किया। यह मिश्रित प्रशिक्षण रचना, जब स्त्री रोग विशेषज्ञों के बीच कैंसर स्क्रीनिंग में क्षमता निर्माण में नियोजित किया जाता है, कैंसर स्क्रीनिंग में ज्ञान और कौशल  को बेहतर बनाने में बहुत प्रभावी ढंग से काम करता है। कैंसर स्क्रीनिंग में HCP के कुशल प्रशिक्षण के लिए यह सरकार के लिए एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है।

संकेत शब्द : कैंसर की रोकथाम; कैंसर स्क्रीनिंग प्रशिक्षण; क्षमता निर्माण; ECHO ; मिश्रित प्रशिक्षण ।

 

 

 

 

                                                                    

                                                                           ABSTRACT

Training health care professionals (HCPs) is one of the most challenging and key factors for the success of a cancer screening program. In order to make this onerous task possible, a hybrid training model, combining the online knowledge-sharing tool of ECHO (Extension of Community Health Outcomes) and in-person training, was proposed by the National Institute of Cancer Prevention and Research (NICPR). The main aim of this article is disseminating our experience on the effectiveness of this hybrid model in training health care providers in cancer prevention. A group of gynecologists was trained using a structured curriculum in cervical and breast cancer screening through a 14-week online course, followed by a three-day in-person training (group A). To analyze the effectiveness of this model, a group of gynecologists who were not part of the online course were enrolled for face-to-face training (group B). All the participants were offered pre- and post-training questionnaires and a pictorial quiz. Group A participants had 60% and 40% more knowledge in cervical and breast cancer screening, respectively, compared with group B before the in-person training. Though group B demonstrated a 51% increase in knowledge post-training, group A performed 26% better than group B in the pictorial quiz-demonstrating better knowledge acquisition. This hybrid training model, when employed in capacity building in cancer screening among gynecologists, works very effectively in improving knowledge and skill set in cancer screening. This can be a potent tool for the government for efficient training of HCPs in cancer screening.

 

Keywords: Cancer prevention; Cancer screening training; Capacity building; ECHO model; Hybrid training.

 

बच्चों में पदार्थ के उपयोग से जुड़े प्रचलन और जोखिम कारक: उत्तर प्रदेश के दो शहरों में एक प्रश्नावली आधारित सर्वेक्षण

Prevalence and risk factors associated with substance use in children: A questionnaire-based survey in two cities of Uttar Pradesh, India.

 

Raj Narain 1Sarita Sardana 1Sanjay Gupta 2

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/33678832/

 

सारांश

पृष्ठभूमि: स्कूली बच्चों के बीच  पदार्थों के उपयोग, विशेष रूप से तम्बाकू और शराब की तीव्र वृद्धि हुई है।

मुख्य उद्देश्य: उपयोगकर्ता छात्रों के बीच तम्बाकू और शराब की आदतों के प्रचलन, आदत शुरू करने  की उम्र और निर्धारकों का आकलन करने के लिए एक अध्ययन किया गया।

परियोजना हेतु अध्यान व्यवस्था और  रचना : यह स्कूली छात्रों के बीच किया गया एक  अंतः- वर्ग पद्धति अध्ययन था।

सामग्री और विधियाँ: नोएडा और गाजियाबाद शहरों के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 7वीं-12वीं (उम्र: 11-19 वर्ष) के छात्रों से शराब और तंबाकू के उपयोग, शुरुआत करने की उम्र, साथियों के प्रभाव,  शुरुआत करने के कारण आदि के बारे में जानकारी एकत्रित की गई थी। ,  बहुचरणी प्रतिचयन (मल्टीस्टेज सैंपलिंग) डिज़ाइन से एक प्रश्नावली दुवारा विभिन्न निर्धारकों के महत्व का आकलन करने के लिए यूनीवेरिएट विश्लेषण किया गया।

परिणाम: ” पदार्थ का उपयोग” (शराब या तंबाकू) 14.3% छात्रों में पाया गया और लड़कियों की तुलना में लड़कों में 1.2 गुना अधिक था (पी <0.05)। इनमें से लगभग 29.5% छात्रों ने 11 साल की उम्र से पहले आदत शुरू की । निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के लड़कों में इसकी व्यापकता काफी अधिक थी। यदि पिता, माता, भाई-बहन या दोस्त भी मादक द्रव्यों का सेवन करते  थे। तो विद्यार्थियों में आदतें 2.2, 3.8 और 4.6 गुना अधिक थीं। सफेदपोश पिता और अधिक शिक्षित माता-पिता के बच्चों में नशीले पदार्थों का सेवन कम होता था। एक तिहाई विद्यार्थियों ने  बुरी आदत दोस्त बनाने के दौरान शुरू की।

निष्कर्ष: छात्रों में मादक द्रव्यों के सेवन का बढ़ता प्रचलन समाज के लिए खतरा है। छात्रों को इन पदर्थो के विभिन्न प्रतिकूल प्रभाव और इनके सेवन न करने के कौशल के बारे में शिक्षित करने के लिए स्कूलों में “पदार्थ उपयोग रोकथाम नीति” शुरू करने से इस खतरे को रोकने में मदद मिल सकती है।

संकेत शब्द : शराब; व्यापकता; छात्र; पदार्थ का उपयोग; तंबाकू।

 

                                                                  

Abstract

Background: There is a sharp increase of substance use, particularly tobacco and alcohol, among schoolchildren.

Aims: A study was undertaken to assess the prevalence, age of initiation, and determinants for the uptake of tobacco and alcohol habits among ever-user students.

Settings and design: This were a cross-sectional study conducted among school students.

Materials and methods: Information on alcohol and tobacco use, age at initiation, peer influence, reason of initiation, etc., was collected from students of class 7th-12th (ages: 11-19 years) studying in schools of Noida and Ghaziabad cities, through a pretested self-administered questionnaire through multistage sampling design. Univariate analysis was done to assess the significance of various determinants.

Results: “Ever use of substance” (alcohol or tobacco) was found in 14.3% students and was 1.2 times more among boys in comparison to girls (P < 0.05). About 29.5% of these students initiated the habit before 11 years of age and its prevalence was significantly more among boys from government schools as compared to private schools. The habits were 2.2, 3.8, and 4.6-fold higher among students if the father, mother, siblings, or friends also used substances. Substance use was less frequent among children of white-collared father and more educated parents. One-third of students up took the habit to make friends.

Conclusion: The rising prevalence of substance use among students is a threat to the society. Introducing a “substance use prevention policy” in schools to educate students about various adverse effects and refusal skills may help curb this menace.

Keywords: Alcohol; prevalence; student; substance use; tobacco.

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धूम्र रहित तंबाकू और मस्तिष्कवाहिकीय दुर्घटना  में सम्बन्ध: एक व्यवस्थित समीक्षा और वैश्विक डेटा का मेटा-विश्लेषण

Association of smokeless tobacco and cerebrovascular accident: a systematic review and meta-analysis of global data

R Gupta 1S Gupta 1S Sharma 2D N Sinha 3R Mehrotra 4

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31067304/

 

 

सारांश

पृष्ठभूमि: आघात  और  धूम्र रहित तंबाकू (SLT) के संबंध को केवल कुछ समीक्षाओं में ही बताया  गया है। वर्तमान मेटा-विश्लेषण का उद्देश्य वयस्क धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में आघात के विस्तृत  व्यापक सारांश जोखिम के साथ उप समूह विश्लेषण को प्रस्तुत करना है।

तरीके: SLT उपयोगकर्ताओं में आघात  के जोखिम का मूल्यांकन करने वाले लेखों के लिए एक व्यवस्थित साहित्य खोज की गई। अध्ययन विशेषताओं और जोखिम अनुमानों को दो लेखकों द्वारा स्वतंत्र रूप से निकाला गया। यादृच्छिक-प्रभाव मॉडल का उपयोग सारांश सापेक्ष जोखिमों का अनुमान लगाने के लिए किया गया।

परिणाम: धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में आघात  का समग्र जोखिम गैर-उपयोगकर्ताओं की तुलना में काफी अधिक था (1.17, 95% CI 1.04-1.30),  विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं में । धूम्रपान के लिए सख्त समायोजन (1.18, 95% सी आई 1.04-1.32) के बाद भी परिणाम अपरिवर्तित रहे। धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में घातक स्ट्रोक का 1.34 गुना या 13.4% अधिक जोखिम था, हालांकि गैर-घातक स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा नहीं पाया गया । चबाने वाले तंबाकू (1.35, 95% CI 1.20-1.50) का उपयोग करने वालों में तंबाकूसेवन  न करने वालों की तुलना में आघात  का उच्च जोखिम देखा गया। लिंग आधारित विश्लेषण में  पुरुष और महिला दोनों उपयोगकर्ताओं में घातक आघात  का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया । घातक आघात  का धूम्र रहित तंबाकू जिम्मेदार अंश भारत के लिए सबसे अधिक (14.8%) था।

निष्कर्ष: धूम्र रहित तंबाकू उपयोग के साथ आघात  का महत्वपूर्ण उच्च जोखिम, धूम्रपान के समायोजन के बाद भी देखा गया I यह विश्लेषण आघात के नियंत्रण और रोकथाम के लिए SLT को छुड़वाने की सलाह को शामिल करने की अनिवार्य आवश्यकता पर बल देता है।

संकेत शब्द :श्रेय देने योग्य अंश ; मस्तिष्कवाहिकीय; मेटा-विश्लेषण; धुंआ रहित तंबाकू; आघात।

Abstract

Background: The association of smokeless tobacco (SLT) with stroke has been dealt with in only a few reviews. The present meta-analysis aims to present the updated comprehensive summary risk of stroke in adult SLT users along with sub group analysis.

Methods: A systematic literature search for articles evaluating risk of stroke in SLT users was conducted. The study characteristics and risk estimates were extracted independently by two authors (RG and SG). Random-effect model was used to estimate the summary relative risks.

Results: The overall risk of stroke in SLT users was found to be significantly higher (1.17, 95% CI 1.04–1.30) compared to non-users, especially for users in Southeast Asian region. The results remained unchanged even after strict adjustment for smoking (1.18, 95% CI 1.04–1.32). SLT users had 1.34 times or 13.4% higher risk of fatal stroke, though risk of nonfatal stroke was not enhanced. Significantly higher risk of stroke was seen in users of chewing tobacco (1.35, 95% CI 1.20–1.50) in comparison to non-chewers. Gender-based analysis showed enhanced risk of fatal stroke in both male and female users. SLT-attributable fraction of fatal stroke was highest for India at 14.8%.

Conclusion: The significant higher risk of stroke with SLT use, even after adjustment for smoking, emphasizes the imperative need to include SLT cessation advice for control and prevention of stroke

Keywords: attributable fraction; cerebrovascular; meta-analysis; smokeless tobacco; stroke.

 

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धूम्र रहित तंबाकू और मस्तिष्कवाहिकीय दुर्घटना  में सम्बन्ध: एक व्यवस्थित समीक्षा और वैश्विक डेटा का मेटा-विश्लेषण

Association of smokeless tobacco and cerebrovascular accident: a systematic review and meta-analysis of global data

R Gupta 1S Gupta 1S Sharma 2D N Sinha 3R Mehrotra 4

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31067304/

 

 

सारांश

पृष्ठभूमि: आघात  और  धूम्र रहित तंबाकू (SLT) के संबंध को केवल कुछ समीक्षाओं में ही बताया  गया है। वर्तमान मेटा-विश्लेषण का उद्देश्य वयस्क धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में आघात के विस्तृत  व्यापक सारांश जोखिम के साथ उप समूह विश्लेषण को प्रस्तुत करना है।

तरीके: SLT उपयोगकर्ताओं में आघात  के जोखिम का मूल्यांकन करने वाले लेखों के लिए एक व्यवस्थित साहित्य खोज की गई। अध्ययन विशेषताओं और जोखिम अनुमानों को दो लेखकों द्वारा स्वतंत्र रूप से निकाला गया। यादृच्छिक-प्रभाव मॉडल का उपयोग सारांश सापेक्ष जोखिमों का अनुमान लगाने के लिए किया गया।

परिणाम: धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में आघात  का समग्र जोखिम गैर-उपयोगकर्ताओं की तुलना में काफी अधिक था (1.17, 95% CI 1.04-1.30),  विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं में । धूम्रपान के लिए सख्त समायोजन (1.18, 95% सी आई 1.04-1.32) के बाद भी परिणाम अपरिवर्तित रहे। धूम्र रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं में घातक स्ट्रोक का 1.34 गुना या 13.4% अधिक जोखिम था, हालांकि गैर-घातक स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा नहीं पाया गया । चबाने वाले तंबाकू (1.35, 95% CI 1.20-1.50) का उपयोग करने वालों में तंबाकूसेवन  न करने वालों की तुलना में आघात  का उच्च जोखिम देखा गया। लिंग आधारित विश्लेषण में  पुरुष और महिला दोनों उपयोगकर्ताओं में घातक आघात  का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया । घातक आघात  का धूम्र रहित तंबाकू जिम्मेदार अंश भारत के लिए सबसे अधिक (14.8%) था।

निष्कर्ष: धूम्र रहित तंबाकू उपयोग के साथ आघात  का महत्वपूर्ण उच्च जोखिम, धूम्रपान के समायोजन के बाद भी देखा गया I यह विश्लेषण आघात के नियंत्रण और रोकथाम के लिए SLT को छुड़वाने की सलाह को शामिल करने की अनिवार्य आवश्यकता पर बल देता है।

संकेत शब्द :श्रेय देने योग्य अंश ; मस्तिष्कवाहिकीय; मेटा-विश्लेषण; धुंआ रहित तंबाकू; आघात।

 

                                                                               Abstract

Background: The association of smokeless tobacco (SLT) with stroke has been dealt with in only a few reviews. The present meta-analysis aims to present the updated comprehensive summary risk of stroke in adult SLT users along with sub group analysis.

Methods: A systematic literature search for articles evaluating risk of stroke in SLT users was conducted. The study characteristics and risk estimates were extracted independently by two authors (RG and SG). Random-effect model was used to estimate the summary relative risks.

Results: The overall risk of stroke in SLT users was found to be significantly higher (1.17, 95% CI 1.04–1.30) compared to non-users, especially for users in Southeast Asian region. The results remained unchanged even after strict adjustment for smoking (1.18, 95% CI 1.04–1.32). SLT users had 1.34 times or 13.4% higher risk of fatal stroke, though risk of nonfatal stroke was not enhanced. Significantly higher risk of stroke was seen in users of chewing tobacco (1.35, 95% CI 1.20–1.50) in comparison to non-chewers. Gender-based analysis showed enhanced risk of fatal stroke in both male and female users. SLT-attributable fraction of fatal stroke was highest for India at 14.8%.

Conclusion: The significant higher risk of stroke with SLT use, even after adjustment for smoking, emphasizes the imperative need to include SLT cessation advice for control and prevention of stroke

Keywords: attributable fraction; cerebrovascular; meta-analysis; smokeless tobacco; stroke.

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परियोजना : मुख कैंसर परीक्षण और तम्बाकू छुड़वाने में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने के लिए एक संभावित सर्वोत्तम-अभ्यास साधन

Project ECHO: a Potential Best-Practice Tool for Training Healthcare Providers in Oral Cancer Screening and Tobacco Cessation.

Suzanne Tanya Nethan 1Roopa Hariprasad 2Roshni Babu 3Vipin Kumar 1Shashi Sharma 4Ravi Mehrotra 5

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31124001/

 

सारांश

 मुख  के कैंसर की महामारी और तंबाकू के सेवन ने समय पर मुख के परीक्षण और तंबाकू छुड़वाने  को अनिवार्य बना दिया है, जिनमें अधिकांश स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की कमी है। परियोजना “सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल परिणामों के लिए विस्तार” परियोजना (इको)ग्रामीण, विशेषज्ञों की कमी वाली व्यवस्थाओं  में जटिल चिकित्सा स्थितियों के प्रबंधन में, शैक्षणिक स्वास्थ्य केंद्रों के विशेषज्ञों द्वारा प्राथमिक देखभाल प्रदाताओं के वर्चुअल टेली मॉनिटरिंग के लिए एक सिद्ध सर्वोत्तम अभ्यास उपकरण है। पहली बार, भारत में हमारे संगठन ने देश और विदेश में मौखिक कैंसर परीक्षण में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने के लिए इस पद्धति का उपयोग किया है। हमारे संगठन द्वारा जूम वेब-कॉन्फ्रेंसिंग एप्लिकेशन के माध्यम से मौखिक कैंसर परीक्षण और तंबाकू छुड़वाने  पर आठ, साप्ताहिक, एक घंटे लंबे सत्र शामिल थे, जिसमें 48    (प्रवक्ता) अपने स्थानों (भारत, n=47; लीबिया, n =1) जुड़ते थे Iप्रत्येक सत्र में एक विशेषज्ञ के नेतृत्व वाली उपदेशात्मक और दो प्रतिभागियों के नेतृत्व वाली केस प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जो शिक्षाप्रद चर्चाओं के साथ समाप्त हुईं। प्रतिभागियों ने ऑनलाइन, कार्यक्रम-मूल्यांकन (पूर्व और बाद) 10 समान, बहु विकल्पीय प्रश्न (प्रत्येक सही प्रतिक्रिया के लिए अंक =1) प्रश्नावली भरी जिसमें कुल प्रतिक्रियाओं का बाद में सांख्यिकीय विश्लेषण किया गया। कम प्रतिभागियों ने मूल्यांकन के बाद की प्रश्नावली को पूरा किया, जो इसके वैकल्पिक होने, उनके व्यस्त होने या मूल्यांकन किए जाने की आशंका के कारण हो सकता है। कार्यक्रम के मूल्यांकन के परिणाम मौखिक कैंसर परीक्षण और तम्बाकू समाप्ति के बारे में प्रतिभागियों के बीच एक महत्वपूर्ण ज्ञान लाभ को दर्शाते हैं, यानी पूर्व कार्यक्रम मूल्यांकन में 6.7अंक औसत  7.4 के  बाद मूल्यांकन में (पी <0.05)। इस प्रकार  (इको) मॉडल का उपयोग एक सुविधाजनक, लागत प्रभावी, बड़े पैमाने पर, सर्वोत्तम-अभ्यास, टेली मॉनिटरिंग उपकरण के रूप में किया जा सकता है, जो विशेष रूप से आबादी वाले, संसाधन की कमी वाले देशों में मौखिक कैंसर परीक्षण और तंबाकू समाप्ति में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किया किया जा सकता है I

संकेत शब्द: स्वास्थ्य प्रदाता; मौखिक कैंसर परीक्षण ;  इको; टेलीमेंटरिंग; तम्बाकू समाप्ति।

ABSTRACT

The oral cancer pandemic and inadvertent tobacco consumption have rendered timely oral cavity screening and tobacco cessation essential, skills which most healthcare providers (HCPs) lack. Project “Extension for Community Healthcare Outcomes” (ECHO) is a proven best-practice tool for virtual tele mentoring of primary care providers by experts at academic health centers, in managing complex medical conditions in rural, expert-deficient setups. For the first time, our organization in India has utilized this method for training HCPs in oral cancer screening, across the country and abroad. The program comprised eight, weekly, hour-long sessions, on oral cancer screening and tobacco cessation, hosted online by our organization (hub) through the Zoom web-conferencing application, with 48 HCPs (spokes) attending from their respective locations (pan-India, n = 47; Libya, n = 1). Each session comprised one expert-led didactic and two participant-led case presentations, culminating with educative discussions. Participants filled out online, program-evaluation (pre and post) questionnaires having 10 similar, multiple-choice questions each (score for every correct response = 1); total responses were later statistically analyzed. Lesser participants completed the post-evaluation questionnaire which could be due to it being optional, their busy schedule, or apprehension of being assessed. The program evaluation results illustrate a significant knowledge gain among participants regarding oral cancer screening and tobacco cessation, i.e., from a mean knowledge score of 6.7 in pre-evaluation to 7.4 in post-evaluation (p < 0.05). Thus, the ECHO model can be utilized as a convenient, cost-effective, large-scale, best-practice, tele mentoring tool for training HCPs in oral cancer screening and tobacco cessation, especially in populous, resource-deficient countries.

Keywords: Healthcare providers; Oral cancer screening; Project ECHO; Tele mentoring; Tobacco cessation.

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धुआँ रहित तम्बाकू छुड़वाने  के लिए व्यवहारिक हस्तक्षेप

 

Behavioral Interventions for Smokeless Tobacco Cessation.

Suzanne Tanya Nethan 1Dhirendra Narain Sinha 2Shashi Sharma 3Ravi Mehrotra 4

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31251347/

 

          

सारांश

परिचय: धूम्र रहित तंबाकू की खपत बढ़ रही है (विशेष रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में) और उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर इसके कई प्रभाव पड़ते हैं। यह लेख 2017 तक दुनिया भर में व्यवहार संबंधी हस्तक्षेपों का उपयोग करके धूम्र रहित तंबाकू समाप्ति के लिए किए गए अध्ययनों की समीक्षा करता है।

पद्यति  : पीको (समस्या, हस्तक्षेप, तुलना, परिणाम) द्वारा व्यवहारिक हस्तक्षेप-आधारित धूम्र रहित तंबाकू समाप्ति अध्ययनों की एक व्यवस्थित समीक्षा की गयी जिनका   न्यूनतम 6 महीने का आगे अनुसरण हो   और जोखिम अनुपात (RR ) और 95% विश्वास अंतराल (CI ) के संदर्भ में परिणामों की रिपोर्टिंग ), 1992 और 2017 के बीच प्रकाशित किया गया था। इसके बाद इन अध्ययनों के परिणामों का एक मेटा-विश्लेषण किया गया, जिसमें वयस्कों और युवाओं के लिए अनियमित प्रभाव मॉडल द्वारा जमा किए गए अनुमानों को, जहां अध्ययन किया गया  उस देश के प्रकार के अनुसार (अर्थात्विकसित या विकासशील), प्राप्त किया गया बेग के परीक्षण द्वारा शामिल अध्ययनों में प्रकाशन पूर्वाग्रह का मूल्यांकन किया गया ।

परिणाम: दुनिया भर से 24 498 प्रतिभागियों सहित उन्नीस योग्य अध्ययन शामिल किए गए थे। विकसित (RR = 1.39, 95% CI = 1.16 से 1.63) और विकासशील (RR = 2.79, 95% CI = 2.32 से 3.25) देशों  में व्यवहार संबंधी हस्तक्षेपों ने वयस्कों (RR = 1.63, 95% CI = 1.32 से 1.94) में धूम्र रहित तंबाकू  समाप्ति में समग्र प्रभाव दिखाया। परन्तु  हस्तक्षेप समग्र रूप से युवाओं (RR = 1.07, 95% CI = 0.73 से 1.41) के बीच धूम्र रहित तंबाकू समाप्ति के लिए विकसित (RR = 1.39, 95% CI = 0.58 से 2.21) या विकासशील ( RR = 0.87, 95% CI = 0.68 से 1.07) देशों में  प्रभावी साबित नहीं हुए I वयस्कों (P = .22) और युवाओं (P = .05) के बीच सभी अध्ययनों में प्रकाशन पूर्वाग्रह का उल्लेख पाया गया।

निष्कर्ष: विकसित और विकासशील दोनों देशों में एकल पद्धति के रूप में व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप धूम्र रहित तंबाकू समाप्ति में प्रभावी हैं। स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को ये सेवाएं प्रदान करने के लिए संवेदनशील करना चाहिए।

आशय: कोक्रेन द्वारा हाल ही में किए गए एक साहित्य सर्वेक्षण ने धूम्र रहित तंबाकू   के लिए हस्तक्षेपों पर अध्ययनों की समीक्षा की, जिसमें व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप शामिल थे, जिसमें केवल विकसित देशों के लोग शामिल थे। वर्तमान विश्लेषण विकसित और विकासशील दोनों देशों (विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र- धूम्र रहित तंबाकू उत्पादों के उच्च बोझ वाले देशों) में किए गए अध्ययनों को शामिल करके एक व्यापक, वैश्विक अद्यतन प्रदान करता है।

ABSTRACT

Introduction: Consumption of smokeless tobacco (SLT) is on the rise (especially in the World Health Organization South-East Asian region) and has numerous repercussions over the consumer’s health. This article reviews studies performed for SLT cessation using behavioral interventions, worldwide till 2017.

Methods: A systematic review by PICO (Problem, intervention, comparison, outcome) of behavioral intervention-based SLT cessation studies with minimum 6 months’ follow-up, reporting outcomes in terms of risk ratios (RRs) and 95% confidence interval (CI), published between 1992 and 2017 was performed. This was followed by a meta-analysis of the outcomes of these studies by deriving the pooled estimates by the random effects model, for those on adults and youth, categorized according to the type of country where the study was performed, that is, in terms of developed or developing. Publication bias among the included studies was assessed by the Begg’s test.

Results: Nineteen eligible studies comprising 24 498 participants, from all over the world were included. Behavioral interventions showed overall efficacy in SLT cessation in adults (RR = 1.63, 95% CI = 1.32 to 1.94) both in the developed (RR = 1.39, 95% CI = 1.16 to 1.63) and developing (RR = 2.79, 95% CI = 2.32 to 3.25) countries. However, these interventions did not prove effective for SLT cessation among youth overall (RR = 1.07, 95% CI = 0.73 to 1.41), either in the developed (RR = 1.39, 95% CI = 0.58 to 2.21) or in the developing (RR = 0.87, 95% CI = 0.68 to 1.07) countries. Publication bias was noted in all the studies among adults (p = .22) and youth (p = .05).

Conclusion: Behavioral interventions as a single modality are effective in SLT cessation, both in the developed and developing countries. Health care providers should be sensitized to provide the same.

Implications: A recent literature survey by Cochrane reviewed studies on interventions for SLT, including behavioral interventions, which included only those from the developed countries. The current analysis provides a broader, global update on the same by including studies performed both in the developed and developing countries (specifically the South-East Asian region-the high burden countries of SLT products).

 

 

 

धूम्ररहित तंबाकू का मुख  के कैंसर से जुड़ाव: व्यवस्थित अध्ययन  समीक्षाओं  की समीक्षा

Association of smokeless tobacco with oral cancer: A review of systematic reviews.

 

 Smita Asthana  1 Parul Vohra  1 Satyanarayana Labani  1

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/32411897/

                                               

 

                                                                       सारांश

परिचय: धूम्र रहित तंबाकू और मुख  के कैंसर के बीच संबंध को समझाने के लिए विभिन्न प्राथमिक अध्ययन और व्यवस्थित समीक्षाएं की गई हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य मेटा-विश्लेषण के साथ या बिना मेटा-विश्लेषण के विभिन्न व्यवस्थित समीक्षाओं से जोखिम अनुमानों को समेकित और सारांशित करना है ताकि धूम्र रहित तंबाकू के उपयोग और मौखिक कैंसर के बीच संबंध पर अनुमानों का विवरण  प्रदान किया जा सके।

विधियाँ: स्वतंत्र रूप से दो लेखकों द्वारा विभिन्न डेटाबेस (PubMed, Google विद्वान, IndMED, और TOXLINE) पर एक व्यापक साहित्य की समीक्षा की  गई थी। शामिल व्यवस्थित समीक्षाओं के लिए गुणात्मक और मात्रात्मक तथ्यों का  निष्कर्षण और विश्लेषण दोनों किए गए थे। शामिल  किए गए अनुमानों के लिए समीक्षाओं के अवलोकन की सीमा के कारण जोखिम अनुमानों की सीमा प्राप्त की गई और मात्रात्मक निष्कर्षों के रूप में उनका विश्लेषण किया गया। CASP (महत्वपूर्ण मूल्यांकन कौशल कार्यक्रम) और AMSTAR 2 (व्यवस्थित समीक्षा का आकलन करने के लिए एक मापन उपकरण) उपकरण शामिल अध्ययनों के गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए उपयोग किए गए थे।

परिणाम: कुल मिलाकर, मेटा-विश्लेषण के साथ या बिना 12 व्यवस्थित समीक्षाओं को समीक्षा में शामिल किया गया था। लिंग, क्षेत्र और धुंआ रहित तंबाकू के प्रकार के बावजूद मौखिक कैंसर के साथ धूम्रपान रहित तंबाकू (SLT ) के उपयोग का एक सकारात्मक और मजबूत संबंध था। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (SEAR) के लिए जोखिम अनुमान 4.44-7.90 के बीच, गुटखा के लिए यह 8.67 था, जबकि पान के लिए यह 6.3-7.90 के बीच था और समग्र SLT के लिए यह 1.36-7.90 के बीच था। महिलाओं के लिए जोखिम का अनुमान 5.83-14.56 के बीच है।

 

निष्कर्ष: अध्ययन ने SLT के उपयोग और मौखिक कैंसर के बीच संबंध ने  पुष्टि की। ये निष्कर्ष विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

संकेत शब्द : मेटा-विश्लेषण; मौखिक कैंसर; धुंआ रहित तंबाकू; व्यवस्थित समीक्षा।

 

                                                                         ABSTRACT

 

Introduction: Various primary studies and systematic reviews have been conducted to explain the association between smokeless tobacco and oral cancer. This study aims to consolidate and summarize the risk estimates from various systematic reviews with or without meta-analysis to provide the spectrum of estimates on the association between smokeless tobacco use and oral cancer.

Methods: A comprehensive literature search was done on various databases (PubMed, Google Scholar, IndMED, and TOXLINE) by two of the authors independently. Both qualitative and quantitative data extraction and analysis were performed for the included systematic reviews. Range of risk estimates was obtained and analyzed as quantitative findings due to the limitation of an overview of reviews for the pooled estimates. CASP (Critical Appraisals Skills Program) and AMSTAR 2 (A Measurement Tool to Assess Systematic Reviews) tools were used for the quality assessment of the studies included.

Results: In total, 12 systematic reviews with or without meta-analysis were included in the review. There was a positive and strong association of Smokeless Tobacco (SLT) use with oral cancer irrespective of gender, region, and type of smokeless tobacco. The risk estimates for the South-East Asia Region (SEAR) ranged 4.44-7.90, for Gutkha it was 8.67, while for Paan it ranged 6.3-7.90 and for overall SLT it ranged 1.36-7.90. Risk estimates for females ranged 5.83-14.56.

Conclusions: The study confirmed the association between SLT use and oral cancer. These findings are of high importance, especially to the South-East Asia Region.

Keywords: meta-analysis; oral cancer; smokeless tobacco; systematic reviews.

 

 

 

तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा केंद्र में सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग सेवाएँ: एक वैकल्पिक दृष्टिकोण

 

Cervical Cancer Screening Services at Tertiary Healthcare Facility: An Alternative Approach

 

Kavitha Dhanasekaran 1Chandresh Verma 1Vipin Kumar 1Roopa Hariprasad 1Ruchika Gupta 1Sanjay Gupta 1Ravi Mehrotra 1

 

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31030504/

 

 

                                                   सारांश

परिचय: भारत बेहद विशाल स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के बोझ से लड़ रहा  है। यह लेख उपचार प्रदान करने के लिए अपने प्राथमिक जनादेश से समझौता किए बिना कैंसर की रोकथाम में योगदान करने के लिए तृतीयक  सुविधा अस्पतालों को सक्षम करने के लिए एक अभिनव व्यवहार्य दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है।

कार्यप्रणाली: 1979 से, राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान ने (NICPR) एक सैटेलाइट क्लिनिक के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के  परीक्षण  में  तृतीयक सुविधाओं के उपयोग का समर्थन करता है। जनवरी-दिसंबर 2016 के बीच इस क्लिनिक के 5328 उपस्थित लोगों के तथ्यों समीक्षा  की गई। प्रशिक्षित (NICPR) एन आई सी पी आर कर्मियों द्वारा पैप-स्मीयर परीक्षण और परिणामों  की विवेचना की  गई। मरीजों की जनसांख्यिकी, प्रजनन इतिहास, पैप-परीक्षण की तारीख,  परीक्षण के कोशिका विज्ञान के परिणाम दर्ज किए गए और परिणामों को आगे के प्रबंधन के लिए संबंधित इकाइयों को सूचित किया गया।

परिणाम: जांच की गई 5328 महिलाओं में, 2% (96/5328) में असामान्य कोशिका विज्ञान था, जिसमें कैंसर कोशिकाएं  (33%; 32/96), एटिपिकल स्क्वैमस सेल-अनिर्धारित महत्व (ASCUS) (20%; 19/96) शामिल थे। एटिपिकल ग्लैंडुलर सेल्स (AGC) (23%; 22/96) पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के साथ 65.6% (59/90), योनि से सफेद स्राव  46.7% (42/90) और कमर  दर्द 23.3% (21/90)। जिसमें मुस्लिम- 67% (65/96), निरक्षर- 58% (56/96)। उम्र>35(पी<0.001), समानता>3(पी<0.05), निरक्षरता (पी<0.05), मुस्लिम महिलाओं (पी<0.05) का असामान्य कोशिका विज्ञान के साथ सकारात्मक संबंध था।

निष्कर्ष: सीमित संसाधन वाले  देशों में सर्वाइकल ( बच्चेदानी के मुख ) कैंसर परीक्षण  के बारे में जागरूकता की तत्काल  और अत्यंत आवश्यकता है। ऐसे देशों के सरकारी अस्पतालों में कैंसर परीक्षण  के लिए पूर्ण रूप से  समर्पित कैंसर विज्ञान विभाग  होना  चाहिए।

संकेत शब्द :सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग; पैप स्मीयर; अवसरवादी स्क्रीनिंग; आबादी आधारित स्क्रीनिंग;

(LMIC) एल एम आई सी ।

 

 

 

                                             Abstract

 

Introduction: India fights massive cervical cancer burden. This article highlights an innovative feasible approach enabling tertiary hospitals to contribute to cancer prevention without compromising their primary mandate to provide treatment.

 

Methodology: Since 1979, National Institute of Cancer Prevention and Research (NICPR) support a tertiary hospital in cervical cancer screening through a satellite clinic. Record review of 5328 attendees of this clinic between January-December 2016 was done. Pap-smear testing and reporting were performed by trained NICPR personnel. Patients’ demographics, reproductive history, Pap-test date, cytology results were recorded and results were communicated to respective units for further management.

 

 

Results: Among 5328 women screened, 2% (96/5328) had abnormal cytology, which included malignancy (33%; 32/96), Atypical Squamous Cells-Undetermined Significance (ASC-US) (20%; 19/96), Atypical Glandular Cells (AGC) (23%; 22/96) with complaints of pain in lower abdomen 65.6% (59/90), white discharge per vaginum 46.7% (42/90) and backache 23.3% (21/90). In which, Muslims- 67% (65/96), illiterates- 58% (56/96). Age>35(p<0.001), parity>3(p<0.05), illiteracy (p<0.05), Muslim women (p<0.05) had positive association with abnormal cytology.

 

Conclusion: Awareness about cervical cancer screening is the immediate need in resource-limited countries. Government hospitals in such countries should house dedicated preventive oncology unit for cancer screening.

 

Keywords: Cervical cancer screening; PAP smear; opportunistic screening; population; based screening; LMIC.

 

 

धूम्ररहित तम्बाकू उत्पादों में मौजूद रसायनों के टॉक्सिकोकाइनेटिक्स और रोग संघ का इन-सिलिको अध्ययन

In-silico study of toxicokinetic and disease association of chemicals present in smokeless tobacco products.

 

Deeksha Bhartiya 1Amit Kumar 1Jasmine Kaur 2Suchitra Kumari 1Amitesh Kumar Sharma 2Dhirendra N Sinha 3Harpreet Singh 4Ravi Mehrotra 5

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29505798/

 

                                                              सारांश

दुनिया भर के 130 से अधिक देशों में लाखों लोग, धुआँ रहित तंबाकू (SLT) प्रोडक्ट का सेवन करते हैं। SLT के इस्तेमाल से कई बीमारियों के होने का अनुमान लगाया गया है, जिसके कारण प्रति वर्ष 0.65 मिलियन से अधिक मौतें होती हैं। महामारी-विज्ञान में , ऐसे बहुत सारे पर्याप्त सबूत देखे गए है, जिनमें SLT प्रोडक्ट के साथ निकोटिन के लत लगने के कारण मुँह का कैंसर और पाचन तंत्र कैंसर देखा गया हैं लेकिन इन रोगों में जहरीले रसायनों की भूमिका को समझने का अभाव हैं । दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न SLT उत्पादों में मौजूद रासायनिक यौगिकों का पहला विस्तृत इन-सिलिको विश्लेषण हमने किया है ।इनमें से कई यौगिकों (कंपाउंड) में म्यूटेजेनिक और विषालु गुणों के साथ अच्छा अवशोषण, घुलनशीलता और प्रवेशता क्षमता पाया जाता हैं । ये, 350 से भी अधिक मानव प्रोटीन के टारगेट के लिए भी पाए गए है  जो की मानव जैविक प्रक्रिया और जैविक मार्ग  में  शामिल हैंI वर्तमान अध्ययन से यह पता चला है कि , पहले से मालूम सभी बीमारियों के साथ,  SLT उत्पादों के यौगिकों के कई अज्ञात रोगों जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव, प्रतिरक्षा और हृदय रोग (बाएं वेंट्रिकुलर गैर संघनन, पतला कार्डियोमायोपैथी आदि) के साथ संबंध पाया गया हैं । ये खोज, मानव स्वास्थ्य पर SLT  प्रोडक्ट के दूरगामी प्रभाव का संकेत देता है जो की पहले से ज्ञात है,  जिसे महामारी-विज्ञान के इन-विट्रो और इन-विवो क्रियाविधि द्वारा मान्यकरण करना होगा । इस प्रकार, यह अध्ययन SLT  प्रोडक्ट  में पाए जाने वाले विषैले  पदार्थ पर नियामक नीतियों के विकास में पॉलिसी बनाने वाले  अधिकारीयों के लिए  एकतरफा  जानकारी प्रदान करेगा।

 संकेत शब्द :ADMET ; कार्सिनोजेन; रासायनिक यौगिक; मार्ग; विनियमन; धुंआ रहित तंबाकू; विषाक्तता; टॉक्सिकोकाइनेटिक्स

                                                            

 

 

                                                                  Abstract

Smokeless tobacco (SLT) products are consumed by millions of people in over 130 countries around the world. Consumption of SLT has been estimated to cause a number of diseases accounting to more than 0.65 million deaths per year. There is sufficient epidemiological evidence on the association of SLT products with nicotine addiction, cancers of oral cavity and digestive systems but there is a lack of understanding of the role of toxic chemicals in these diseases. We provide the first comprehensive in-silico analysis of chemical compounds present in different SLT products used worldwide. Many of these compounds are found to have good absorption, solubility and permeability along with mutagenic and toxic properties. They are also found to target more than 350 human proteins involved in a plethora of human biological processes and pathways. Along with all the previously known diseases, the present study has identified the association of compounds of SLT products with a number of unknown diseases like neurodegenerative, immune and cardiac diseases (Left ventricular non compaction, dilated cardiomyopathy etc.). These findings indicate far-reaching impact of SLT products on human health than already known which needs further validations using epidemiological, in-vitro and in-vivo methodologies. Thus, this study will provide one stop information for the policy makers in development of regulatory policies on toxic contents of SLT products.

 

Keywords: ADMET; Carcinogen; Chemical compounds; Pathway; Regulation; Smokeless tobacco; Toxicity; Toxicokinetic

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धूम्रपान रहित तम्बाकू उपयोगकर्ताओं के बीच कोरोनरी हृदय रोग का जोखिम: वैश्विक डेटा की व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण के परिणाम

A systematic review on association between smokeless tobacco & cardiovascular diseases

Ruchika Gupta 1Sanjay Gupta 1Shashi Sharma 2Dhirendra N Sinha 3Ravi Mehrotra 4

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6172910/

 

                                   सारांश  

पृष्ठभूमि: धूम्र रहित तम्बाकू (SLT ) उत्पादों के उपयोग को कई प्रतिकूल प्रभावों,  विशेष रूप से मौखिक गुहा के पूर्व कैंसर और कैंसर से जोड़ा गया है। परन्तु, SLT के उपयोग से कोरोनरी हृदय रोग (CHD) के जोखिम से जुड़े  अध्ययन साहित्य में परस्पर विरोधी परिणामों के कारण यह विषय विवादों से घिरा हुआ है। वर्तमान मेटा-विश्लेषण का उद्देश्य SLT  उत्पादों के वयस्क उपयोगकर्ताओं के बीच कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम का मूल्यांकन व उप-समूह विश्लेषण करना था ।

तरीके: इस विश्लेषण में एक व्यवस्थित साहित्य खोज से प्राप्त उन प्रकाशित लेखों को शामिल किया गया जिनमें  SLT उपयोग के साथ कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम का आकलन किया गया था । दो लेखकों ने स्वतंत्र रूप से सभी शामिल अध्ययनों के जोखिम अनुमान और अध्ययन विशेषताओं को निकाला । क्रमरहित-प्रभाव प्रतिमान (मॉडल) का उपयोग करके सारांश में सापेक्ष जोखिमों का अनुमान लगाया गया I

परिणाम: चार WHO  क्षेत्रों से बीस अध्ययनों को इस विश्लेषण में शामिल किया गया। हालांकि SLT उपयोगकर्ताओं में कोरोनरी हृदय रोग का सारांश जोखिम अर्थपूर्ण सकारात्मक नहीं था (1.05, 95% CI = 0.96 से 1.15), परन्तु  घातक CHD का जोखिम SLT उपयोगकर्ताओं में अधिक था (1.10, 95% CI = 1.00 से 1.20)। यूरोपीय क्षेत्र (1.30, 95% CI = 1.14 1.47) के उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम महत्वपूर्ण था। धूम्रपान के लिए कड़े समायोजन के बाद भी परिणाम अपरिवर्तित रहे। उत्पाद-वार विश्लेषण से स्नस / नसवार के उपयोग (1.37, 95% CI = 1.14 से 1.61) के साथ घातक CHD के महत्वपूर्ण सकारात्मक जुड़ाव का पता चला। घातक कोरोनरी हृदय रोग के SLT-जिम्मेदार अंश की गणना 0.3% की गई, जो कि यूरोपीय क्षेत्र (5%) के लिए उच्चतम है।

निष्कर्ष: SLT के उपयोग और घातक कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पाया गया, जो विशेष रूप से यूरोपीय उपयोगकर्ताओं और स्नूस /नसवार  का सेवन करने वालों के लिए उभर कर आया । धूम्रपान के लिए सख्त समायोजन के बाद भी इस सम्बन्ध को देखा गया I अतः यह परिणाम घातक हृदय रोगों के नियंत्रण के लिए धूम्रपान के अलावा धूम्रपान रहित तंबाकू को छोड़ने  के प्रयासों को शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

प्रभाव: वर्तमान मेटा-विश्लेषण कोरोनरी हृदय रोग (CHD) और धूम्रपान रहित तंबाकू (SLT) के उपयोग के बीच संबंध के वैश्विक परिप्रेक्ष्य को प्रदर्शित करता है, विशेष रूप से घातक हृदय संबंधी घटनाओं के लिए, यहां तक कि धूम्रपान के लिए सख्त समायोजन के बाद भी  प्रयुक्त धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पाद के प्रकार के आधार पर इस प्रभाव में कुछ अंतर प्रतीत होता है। ये परिणाम कोरोनरी हृदय रोग पर धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पादों के स्वतंत्र हानिकारक प्रभाव को उजागर करते हैं और कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम के साथ धूम्रपान रहित तंबाकू के संबंध में लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, हम प्रस्ताव करते हैं कि हृदय रोगों के नियंत्रण के लिए धूम्रपान के साथ ही  धूम्रपान रहित तंबाकू के उपयोग को भी छोड़ने के प्रयासो भी किये जाने  चाहिए।

संकेत शब्द : कार्डियोवैस्कुलर – उच्च रक्तचाप – मायोकार्डियल  इन्फार्क्शन  – धुआं रहित तंबाकू – स्ट्रोक ।

                                                                             Abstract  

Background: Use of smokeless tobacco (SLT) products has been linked to multiple adverse effects, especially precancer and cancer of oral cavity. However, the association of SLT use with risk of coronary heart disease (CHD) is shrouded with controversy due to conflicting results in the literature. The present meta-analysis aimed to evaluate the risk of CHD among adult ever-users of SLT products along with sub-group analysis.

Methods: The analysis included studies retrieved from a systematic literature search for published articles assessing risk of CHD with SLT use. Two authors independently extracted risk estimates and study characteristics of the included studies. Summary relative risks were estimated using the random-effect model.

Results: Twenty studies from four WHO regions were included in the analysis. The summary risk of CHD in SLT users was not significantly positive (1.05, 95% CI = 0.96 to 1.15) although a higher risk of fatal CHD was seen (1.10, 95% CI = 1.00 to 1.20). The risk was significant for users in European Region (1.30, 95% CI = 1.14 to 1.47). The results remained unchanged even after strict adjustment for smoking. Product-wise analysis revealed a significant positive association of fatal CHD with snus/snuff use (1.37, 95% CI = 1.14 to 1.61). The SLT-attributable fraction of fatal CHD was calculated to be 0.3%, highest being for European region (5%).

Conclusion: A significant positive association was detected between SLT use and risk of fatal CHD, especially for European users and those consuming snus/snuff. In view of the positive association even after strict adjustment for smoking, these results underscore the need for inclusion of cessation efforts for smokeless tobacco in addition to smoking for control of fatal cardiovascular diseases.

Implications: The present meta-analysis demonstrates a global perspective of association between coronary heart disease (CHD) and use of smokeless tobacco (SLT), especially for fatal cardiac events, even with strict adjustment for smoking. There appears to be some difference in this effect based on the type of SLT product used. These results highlight the independent deleterious effect of SLT products on the outcome of CHD and might help to resolve the long-standing controversy regarding the association of SLT with the risk of CHD. Hence, we propose that in addition to smoking, cessation efforts should be directed towards SLT products as well, for control of cardiovascular diseases.

Keywords: Cardiovascular – hypertension – myocardial infarction – smokeless tobacco – stroke.

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धूम्ररहित तंबाकू के प्रकार और कैंसर के खतरे के बीच संबंध: एक व्यवस्थित समीक्षा

  Relationship between type of smokeless tobacco & risk of cancer: A systematic review

Sanjay Gupta 1Ruchika Gupta 1Dhirendra N Sinha 2Ravi Mehrotra 3

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/30264755/

 

सारांश

पृष्ठभूमि और उद्देश्य:  धूम्ररहित तम्बाकू के उपयोग और  मुख के संभावित घातक विकारों व मौखिक गुहा, ग्रासनली  और अग्न्याशय के कैंसर में प्रेरक सम्बन्ध बताए गए हैं। प्रकाशित मेटा-विश्लेषणों ने वैश्विक और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर धूम्ररहित तम्बाकू के कारण होने वाले प्रमुख कैंसरों के लिए  जोखिम अनुमान प्रदान किए हैं। इस व्यवस्थित समीक्षा का उद्देश्य विभिन्न धूम्ररहित तम्बाकू उत्पादों के कारण कैंसर की घटना और मृत्यु दर के जोखिम पर उपलब्ध अध्ययनों को सारांशित करना था।

तरीके: धूम्ररहित तम्बाकू और कैंसर पर अवलोकन अध्ययन के लिए PubMed और Google  डेटा बेस को 1985 से जनवरी 2018 तक व्यवस्थित रूप से खोजा गया। शामिल अध्ययनों का मूल्यांकन किया गया और तथ्यों को  निकाल कर  समीक्षा की गई।

परिणाम: समीक्षा में विभिन्न कैंसरोंके लिए 121 जोखिम अनुमान प्रदान करने वाले 80 अध्ययन शामिल थे। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र (SEAR) और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र (EMR) के अधिकांश अध्ययनों ने मौखिक [विषम अनुपात (OR) 1.48 से 27.4 के बीच] और ग्रासनली के कैंसर (OR 2.06 और 12.8 के बीच) के साथ धूम्ररहित तम्बाकू के उपयोग का एक महत्वपूर्ण सम्बन्ध दिखाया, जबकि यूरोपीय क्षेत्र (EUR) के अध्ययन ने अग्नाशय के कैंसर (OR 1.6 और 2.1 के बीच) के साथ सम्बन्ध की सूचना दी। कैंसर से संबंधित मृत्यु दर का मूल्यांकन करने वाली कुछ रिपोर्टों में फेफड़े (OR 2.0 और 9.1 के बीच), गर्भाशय के मुख  (OR 2.0) और पुरुष ग्रंथि  (OR 2.1) कैंसर की मृत्यु दर धूम्ररहित तम्बाकू उपयोगकर्ताओं में अधिक थी। विभिन्न कैंसरोंऔर विशिष्ट धूम्ररहित तम्बाकू उत्पादों के संबंध में उनकी प्रकृति, उपयोग के तरीकों और निहित विषाक्तता के आधार पर व्यापक भिन्नता देखी गई। चबाने वाले तंबाकू उत्पादों में से अधिकांश ने मौखिक और ग्रासनली  कैंसर के लिए उच्च जोखिम प्रदर्शित किया, जबकि स्नुस   के लिए ऐसा नहीं देखा गया।

व्याख्या और निष्कर्ष: यह समीक्षा SEAR और EMR में मुख  और ग्रासनली  कैंसर और EUR में अग्नाशय के कैंसर के साथ धूम्ररहित तम्बाकू के उपयोग के महत्वपूर्ण जुड़ाव पर जोर देती है। SLT  से जुड़े कैंसर के लिए मृत्यु दर के अनुमानों को और अधिक विश्लेषण की आवश्यकता है।  धूम्ररहित तम्बाकू उपयोगकर्ताओं में अन्य स्थान  के कैंसर के जोखिम विश्लेषण के लिए भी बहु-केंद्रित अच्छी रचना से  किए गए अध्ययनों की आवश्यकता है।

संकेत शब्द : कैंसर – मृत्यु दर – घटना – ग्रासनली – मौखिक – अग्न्याशय – ग्रसनी – धुआं रहित तंबाकू।

Abstract

Background & objectives: Causative linkages of smokeless tobacco (SLT) use with oral potentially malignant disorders and cancers of oral cavity, esophagus and pancreas have been reported. Published meta-analyses have provided pooled risk estimates for major cancers caused by SLT, both on global and regional levels. This systematic review was aimed at summarizing the available studies on occurrence and mortality risk of common cancers due to various SLT products.

Methods: PubMed and Google Scholar databases were systematically searched from 1985 till January 2018 for observational studies on SLT and cancer. The included studies were evaluated and data were extracted and reviewed.

Results: The review included 80 studies providing 121 risk estimates for various cancers. Majority of the studies from South-East Asian Region (SEAR) and Eastern Mediterranean Region (EMR) showed a significant positive association of SLT use with oral [odds ratio (OR) ranging from 1.48 to 27.4] and esophageal cancers (OR between 2.06 and 12.8), while studies from European Region (EUR) reported a positive association with pancreatic cancer (OR between 1.6 and 2.1). Cancer-related mortality was evaluated in a few reports with higher risk of mortality for lung (OR between 2.0 and 9.1), cervical (OR 2.0) and prostate (OR 2.1) cancers. A wide variation was noted in the association of various cancers and specific SLT products based on their nature, methods of use and inherent toxicity. The majority of chewing tobacco products displayed higher risk for oral and esophageal cancers while the same was not observed for snus.

Interpretation & conclusions: This review emphasizes on the significantly positive association of SLT use with oral and esophageal cancers in SEAR and EMR and pancreatic cancer in EUR. Mortality estimates for SLT-associated cancers need further analysis. Risk analysis for cancers of other sites in SLT users also requires multicentric well-designed studies.

Keywords: Cancer – mortality – occurrence – esophagus – oral – pancreas – pharynx – smokeless tobacco

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धूम्र रहित तम्बाकू समाप्ति हस्तक्षेप: एक व्यवस्थित समीक्षा

 Smokeless tobacco cessation interventions: A systematic review.

Suzanne Tanya Nethan 1Dhirendra Narain Sinha 2Kumar Chandan 3Ravi Mehrotra 3

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/30666002/

  सारांश

पृष्ठभूमि और उद्देश्य: धुआं रहित तंबाकू (SLT ) की खपत एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, लगभग 350 मिलियन उपयोगकर्ताओं और मुख  के कैंसर और मायोकार्डियल विकारों जैसे कई प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों के साथ । इसलिए, SLT का उपयोग बंद करना उतना ही आवश्यक है जितना कि धूम्रपान बंद करना। धूम्र रहित तम्बाकू छुड़वाने हेतु हस्तक्षेप अध्ययन   पर उपलब्ध साहित्य का नवीनतम विवरण  यहां दिया गया है।

तरीके: SLT  CESSATION  INTERVENTION  अध्ययन  पर SLT , CESSATIONS , INTERVENTION , QUITLINES  , संक्षिप्त सलाह, एन आर टी , निकोटिन गम, निकोटिन लोजेंज, निकोटिन पैच, बूप्रोपियन, वैरेनिकलाइन, एमहेल्थ, आदि जैसे संकेतकों  का उपयोग करके,  एक व्यापक साहित्य की समीक्षा  के माध्यम से, 9 पात्र अध्ययनों का चयन किया गया। इसके अलावा, हस्तक्षेपों की प्रभावकारिता का मूल्यांकन रिपोर्ट किए गए जोखिम अनुपात (RR ) [आत्मविश्वास अंतराल (CI )] और  तम्बाकू छोड़ने की दरों से किया गया।

परिणाम: अध्ययन स्कैंडिनेविया, भारत, यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान और अमेरिका में आयोजित किए गए, जिसमें एक महीने से 10 साल तक की परिवर्तनीय अनुवर्ती अवधि थी। अकेले व्यवहार संबंधी हस्तक्षेपों ने SLT  समाप्ति में उच्च प्रभावकारिता दिखाई; अधिकांश अध्ययन वयस्कों के बीच आयोजित किए गए और सकारात्मक प्रभाव देखे गए, यानी RR  [CI ] 0.87 [0.7, 1.09] से 3.84 [2.33, 6.33], छह महीने में 9-51.5 प्रतिशत के बीच छोड़ने की दर। नियमित टेलीफोन सहायता/क्विटलाइन भी लाभकारी सिद्ध हुई। औषध विज्ञान तौर-तरीकों में, निकोटीन लोजेंज और वैरेनिकलाइन SLT समाप्ति में प्रभावी साबित हुए।

व्याख्या और निष्कर्ष: विश्व स्तर पर SLT  समाप्ति हस्तक्षेप परीक्षणों पर सीमित जानकारी उपलब्ध है, जिस पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, विशेष रूप से कम संसाधन वाले, उच्च SLT  बोझ वाले देशों में; व्यवहारिक हस्तक्षेप ऐसी  व्यवस्थाओं  के लिए सबसे उपयुक्त हैं। स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के उचित प्रशिक्षण/संवेदीकरण, और स्कूल-आधारित SLT  उपयोग रोकथाम और समाप्ति कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

संकेत शब्द : व्यवहार; हस्तक्षेप; निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी; धुंआ रहित तंबाकू; तम्बाकू निर्भरता; तंबाकू का उपयोग बंद करना।

ABSTRACT

Background & objectives: Smokeless tobacco (SLT) consumption is a global health issue with about 350 million users and numerous adverse health consequences like oral cancer and myocardial disorders. Hence, cessation of SLT use is as essential as smoking cessation. An update on the available literature on SLT cessation intervention studies is provided here.

 

Methods: Through an extensive literature search on SLT cessation intervention studies, using keywords such as smokeless tobacco, cessation, interventions, Quitline, brief advice, nicotine replacement therapy, nicotine gum, nicotine lozenge, nicotine patch, bupropion, varenicline, mHealth, etc., 59 eligible studies were selected. Furthermore, efficacy of the interventions was assessed from the reported risk ratios (RRs) [confidence intervals (CIs)] and quit rates.

 

Results: Studies were conducted in Scandinavia, India, United Kingdom, Pakistan and the United States of America, with variable follow up periods of one month to 10 years. Behavioral interventions alone showed high efficacy in SLT cessation; most studies were conducted among adults and showed positive effects, i.e., RR [CI] 0.87 [0.7, 1.09] to 3.84 [2.33, 6.33], quit rate between 9-51.5 per cent, at six months. Regular telephone support/Quitline also proved beneficial. Among pharmacological modalities, nicotine lozenges and varenicline proved efficacious in SLT cessation.

Interpretation & conclusions: Globally, there is limited information available on SLT cessation intervention trials, research on which must be encouraged, especially in the low-resource, high SLT burden countries; behavioral interventions are most suitable for such settings. Appropriate training/sensitization of healthcare professionals, and school-based SLT use prevention and cessation programs need to be encouraged.

Keywords: Behavioral; intervention; nicotine replacement therapy; smokeless tobacco; tobacco dependence; tobacco use cessation.